
चेन्नई: पूनमल्ली में एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने शुक्रवार को कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी शशिकुमार की 2016 की हत्या के लिए प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कैडरों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चार व्यक्तियों - सदाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन - को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
एजेंसी ने कहा कि केंद्र द्वारा संगठन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पीएफआई कार्यकर्ताओं से जुड़े किसी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा यह पहली सजा है।
22 सितंबर, 2016 को कोयंबटूर में शशिकुमार की हत्या कर दी गई थी। एनआईए के अनुसार, यह हत्या समाज के एक वर्ग में आतंक फैलाने और सांप्रदायिक अशांति पैदा करने की साजिश के तहत की गई थी।
इस घटना के बाद कोयंबटूर शहर और ग्रामीण सहित कई जगहों पर हिंसा हुई और राज्य पुलिस ने 300 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं।
मामला शुरू में कोयंबटूर के थुदियालुर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था और बाद में सीबी-सीआईडी ने जांच की। 22 जनवरी 2018 को केंद्र के आदेश के बाद मामला एनआईए को ट्रांसफर कर दोबारा दर्ज किया गया. एनआईए की जांच में पाया गया कि पीएफआई के सक्रिय सदस्यों के रूप में पहचाने गए आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची और हत्या को अंजाम दिया। एजेंसी ने पांच आरोपियों के खिलाफ एक आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दायर किये.
मुकदमा 2019 में शुरू हुआ, जिसमें अभियोजन पक्ष के 75 गवाहों और बचाव पक्ष के दो गवाहों से पूछताछ की गई। चारों को आईपीसी की धारा 302, 120-बी और 153-ए और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 16, 18 और 20 के तहत दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने पांचवें आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुथगीर को बरी कर दिया. एनआईए ने कहा कि वह फैसले की जांच कर रही है और अपीलीय अदालत के समक्ष बरी किए जाने को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रही है।





