तमिलनाडू

कीलाडी और आदिचनल्लूर के DNA अध्ययन से मिले अहम संकेत

Kavita2
5 Aug 2026 11:44 AM IST
कीलाडी और आदिचनल्लूर के DNA अध्ययन से मिले अहम संकेत
x

चेन्नई। तमिलनाडु के ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थलों कीलाडी और आदिचनल्लूर से मिले मानव अवशेषों के DNA विश्लेषण से प्राचीन आबादी को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन स्थलों पर रहने वाले लोगों का जेनेटिक संबंध दक्षिण भारतीय, श्रीलंकाई तमिल और व्यापक दक्षिण एशियाई मूल की आबादी से काफी समानता रखता है।

यह प्रारंभिक निष्कर्ष मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स विभाग की ‘एन्शिएंट DNA लैब’ में किए गए अध्ययन के आधार पर सामने आया है। शोधकर्ताओं ने इन पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त पुराने और काफी हद तक खराब हो चुके DNA नमूनों का आधुनिक तकनीक की मदद से विश्लेषण किया है।

बताया जा रहा है कि प्राचीन DNA नमूनों पर काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि हजारों साल पुराने अवशेषों में DNA की मात्रा काफी कम हो जाती है और बाहरी तत्वों से दूषित होने की संभावना भी रहती है। इसके बावजूद लैब की टीम ने इन नमूनों से 75,000 से अधिक जेनेटिक मार्कर्स को सफलतापूर्वक प्रोसेस किया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन तमिलनाडु के प्राचीन समाज, उनकी जीवनशैली और उस समय की आबादी के आपसी संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। DNA विश्लेषण से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हजारों वर्ष पहले इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों का अन्य आबादी समूहों से किस प्रकार का संबंध था।

कीलाडी तमिलनाडु का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जहां खुदाई के दौरान प्राचीन शहरी जीवन के कई प्रमाण मिले हैं। वहीं, आदिचनल्लूर भी अपने पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है, जहां से प्राचीन सभ्यता से जुड़े कई अवशेष मिले हैं।

एन्शिएंट DNA लैब की स्थापना नवंबर 2022 में तमिलनाडु में पुरातात्विक खुदाई से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस लैब का उद्देश्य पुराने मानव अवशेषों से वैज्ञानिक जानकारी हासिल करना और राज्य के प्राचीन इतिहास को बेहतर तरीके से समझना है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि शुरुआती निष्कर्ष अभी अध्ययन के शुरुआती चरण का हिस्सा हैं। विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें DNA डेटा, पुरातात्विक प्रमाण और ऐतिहासिक संदर्भों को मिलाकर व्यापक विश्लेषण किया जाएगा।

उम्मीद है कि इस अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट दिसंबर 2026 तक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू जर्नल्स में प्रकाशित की जा सकती है। वैज्ञानिक समुदाय इस शोध के अंतिम निष्कर्षों का इंतजार कर रहा है, क्योंकि इससे दक्षिण भारत के प्राचीन मानव इतिहास को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन DNA अध्ययन इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रहे हैं। पहले जहां केवल पुरातात्विक अवशेषों, मिट्टी के बर्तनों, औजारों और स्थापत्य के आधार पर इतिहास का अध्ययन किया जाता था, वहीं अब जेनेटिक विज्ञान की मदद से प्राचीन आबादी की उत्पत्ति और उनके संबंधों की अधिक गहराई से जांच संभव हो रही है।

कीलाडी और आदिचनल्लूर से जुड़े इस शोध को तमिलनाडु के पुरातात्विक अध्ययन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यदि आगे के विश्लेषण में शुरुआती निष्कर्षों की पुष्टि होती है, तो यह दक्षिण भारत की प्राचीन आबादी और उनके विकासक्रम को समझने में अहम योगदान दे सकता है।

फिलहाल वैज्ञानिक टीम आगे के विश्लेषण और डेटा की जांच में जुटी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इन प्राचीन स्थलों से जुड़े मानव इतिहास की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

Next Story