
चेन्नई: पुरातत्व मंत्री ए. राजमोहन ने बुधवार को कीझाड़ी खुदाई से मिली चीज़ों का बचाव करते हुए कहा कि ये वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उन्हें रिसर्च पर कोई शक है, तो वे इस जगह की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाएं।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सिर्फ़ एक चीज़ से इतिहास तय किया जा सकता है, राजमोहन ने कहा कि राज्य सरकार कीझाड़ी के मामले को "वैज्ञानिक नज़रिए से देख रही है, न कि भावनात्मक तौर पर।"
उन्होंने कहा, "अगर वे अभी भी संतुष्ट नहीं हैं, तो एक कमेटी बना लें। मैं भी साथ चलूंगा। आइए सीधे कीझाड़ी चलते हैं। अगर यह वैज्ञानिक नहीं है, तो वे बताएं कि क्यों नहीं है।"
मंत्री ने कहा कि पुरातत्वविदों, जिनमें खुदाई के पूर्व निदेशक अमरनाथ रामकृष्ण भी शामिल हैं, और अलग-अलग समय पर रही सरकारों ने हमेशा कीझाड़ी की खोजों के महत्व को माना है।
इस जगह को "भारत का गौरव" बताते हुए राजमोहन ने कहा कि खुदाई से मिली चीज़ें न सिर्फ़ तमिल सभ्यता की कहानी बताती हैं, बल्कि विश्व सभ्यता का एक अहम अध्याय भी हैं। उन्होंने वैज्ञानिक सबूतों के तौर पर हाथी के दांत की कंघियों, पत्थर के औज़ारों, लोहे की चीज़ों और दो रंगों वाले मिट्टी के बर्तनों की उम्र का ज़िक्र किया।
मिट्टी के बर्तन के एक टुकड़े पर मिले तमिल-ब्राह्मी शिलालेख का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह शिलालेख सिर्फ़ राजाओं के बजाय आम लोगों की ज़िंदगी को दिखाता है। उन्होंने कहा, "आमतौर पर शिलालेखों पर राजाओं के नाम होते हैं। लेकिन यहाँ, जिस व्यक्ति ने बर्तन बनाया या जिसका वह बर्तन था, उसका नाम भी उस पर लिखा हुआ है।"
राजमोहन ने कहा कि राज्य सरकार कीझाड़ी से जुड़े सभी दस्तावेज़ों और सबूतों के साथ तैयार है और उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह रिसर्च के नतीजों को जल्द से जल्द प्रकाशित करे।





