
धर्मपुरी/होगेनक्कल। कर्नाटक के बांधों से छोड़ा गया पानी तीन दिन की यात्रा के बाद मंगलवार सुबह तमिलनाडु की सीमा पर स्थित बिलिकुंडुलु पहुंच गया। इसके साथ ही होगेनक्कल जलप्रपात में कावेरी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है और झरनों में पानी का बहाव तेज हो गया है। पिछले कई दिनों से कावेरी नदी में लगातार घटते जलप्रवाह के कारण सूखे जैसे हालात बन गए थे, लेकिन अब दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने से स्थिति में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, हर वर्ष जून महीने में शुरू होने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार केरल में सामान्य समय से पहले पहुंच गया था। हालांकि कर्नाटक में मानसून की सक्रियता अपेक्षाकृत देर से देखने को मिली। इसका सीधा असर कावेरी नदी के जलप्रवाह पर पड़ा। कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण वहां से नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ा नहीं जा सका। परिणामस्वरूप कावेरी नदी का जलप्रवाह लगातार घटता गया और कई स्थानों पर नदी का स्वरूप बेहद कमजोर हो गया।
होगेनक्कल, जिसे दक्षिण भारत का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और "भारत का नियाग्रा" भी कहा जाता है, वहां पिछले कुछ दिनों के दौरान हालात चिंताजनक बने हुए थे। कावेरी नदी का जलस्तर इतना कम हो गया था कि ऐंधारुवी झरने सहित कई छोटे-बड़े झरने पूरी तरह सूख गए थे। मुख्य जलप्रपात और सिनी झरने में भी बहुत कम मात्रा में पानी बह रहा था। जलप्रवाह घटने से पर्यटकों की संख्या में कमी आई और स्थानीय नाव चालकों तथा पर्यटन से जुड़े लोगों की आय भी प्रभावित हुई।
इस बीच केरल और कर्नाटक के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही वर्षा के कारण नदियों और सहायक जलधाराओं में पानी की आवक बढ़ने लगी। इसके बाद कर्नाटक के बांधों में जलस्तर बढ़ने पर वहां से नियंत्रित मात्रा में पानी छोड़ा गया। यही पानी तीन दिन बाद तमिलनाडु की सीमा पर स्थित बिलिकुंडुलु पहुंचा, जहां जल संसाधन विभाग द्वारा नदी के जलप्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है।
बिलिकुंडुलु में पानी पहुंचने के बाद होगेनक्कल जलप्रपात में भी जलप्रवाह धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। झरनों में पहले की तुलना में अधिक वेग से पानी बह रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य फिर से लौटता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की बारिश इसी तरह जारी रही और कर्नाटक के बांधों से आवश्यकता के अनुसार पानी छोड़ा जाता रहा, तो कावेरी नदी का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी नदी का प्रवाह मुख्य रूप से कर्नाटक और केरल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करता है। जब इन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश होती है, तब बांधों में पानी का संग्रह बढ़ता है और अतिरिक्त पानी नदी में छोड़ा जाता है। इससे तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलता है। वहीं वर्षा कम होने पर सबसे पहले होगेनक्कल जैसे क्षेत्रों में इसका असर दिखाई देता है।
जलप्रवाह बढ़ने के साथ प्रशासन भी सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है। यदि बारिश का सिलसिला तेज रहता है और बांधों से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ती है, तो जलप्रवाह में अचानक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में नदी में उतरने या खतरनाक स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बढ़ते जलप्रवाह का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पानी की कमी के कारण पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन अब जलप्रपात में पानी बढ़ने से पर्यटकों के आने की उम्मीद फिर से बढ़ गई है। इससे स्थानीय होटल, रेस्तरां, नाव संचालकों और छोटे व्यापारियों को भी राहत मिलने की संभावना है।
फिलहाल कावेरी नदी में पानी का बहाव बढ़ने से राहत का माहौल है। मौसम विभाग के अनुसार, केरल और कर्नाटक के कई जलग्रहण क्षेत्रों में आगामी दिनों में भी अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो कावेरी नदी में जलप्रवाह और मजबूत होगा तथा होगेनक्कल जलप्रपात एक बार फिर अपने पूरे प्राकृतिक वैभव के साथ दिखाई देगा।





