तमिलनाडू
ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि केस में जांच तेज पुराने अफसरों से भी पूछताछ
Ratna Netam
25 Sept 2026 3:14 PM IST

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चेन्नई। तमिलनाडु में 84 वर्षीय ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि से जुड़े POCSO मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। तमिलनाडु पुलिस ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। खास बात यह है कि इस टीम में चारों वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी हैं। इसके साथ ही पहले मामले की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक और पुलिस बल के प्रमुख महेश कुमार अग्रवाल के आदेश पर SIT बनाई गई है। इस टीम का नेतृत्व चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच की एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस पी.सी. थेनमोझी करेंगी। उनके अलावा जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस दिशा मित्तल, पुलिस अधीक्षक जे. मुथारसी और क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रन विंग की डिप्टी कमिश्नर वी.वी. गीतांजलि को टीम में शामिल किया गया है।
SIT की जांच चेन्नई पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज की निगरानी में होगी। उन्हें जांच टीम को जरूरी पुलिस बल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। नई टीम मामले से जुड़े आरोपों, उपलब्ध सबूतों और पिछली जांच के दौरान उठाए गए कदमों का अध्ययन करेगी।मामला GEM Granites के संस्थापक आर. वीरमणि से जुड़ा है। पुलिस ने वीरमणि को 29 अगस्त को उनके दो कथित सहयोगियों एम. शांति और महेंद्र सिम्हन के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि एक नाबालिग लड़की का यौन शोषण किया गया था। मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज है और आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
यह मामला अक्टूबर 2025 में उस समय सामने आया था, जब पुलिस को एक पेन ड्राइव दी गई थी। इसमें एक वीडियो होने की बात कही गई, जिसमें कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण दिखाई दे रहा था। इसके आधार पर सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया था। शुरुआती जांच में पुलिस पीड़िता की पहचान नहीं कर पाई और पर्याप्त सबूत नहीं मिलने का हवाला देते हुए मामले को बंद करने की अनुमति मांगी गई थी।हालांकि विशेष POCSO अदालत ने मामले को बंद करने की पुलिस की कोशिश को स्वीकार नहीं किया और आगे जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद जांच ने दोबारा रफ्तार पकड़ी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बाद की जांच में वीडियो से जुड़ी लड़की की पहचान की गई और उसका बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया। इसके बाद जांच का दायरा अन्य संभावित पीड़िताओं तक बढ़ाया गया।
अब SIT के गठन के साथ मामले की पिछली जांच भी सवालों के घेरे में है। चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने पहले इस मामले की जांच से जुड़े एक असिस्टेंट कमिश्नर और दो इंस्पेक्टरों को पूछताछ के लिए बुलाया। इनमें असिस्टेंट कमिश्नर यास्मीन और एंटी-वाइस स्क्वॉड के इंस्पेक्टर महेश कुमार तथा राजलक्ष्मी शामिल हैं। अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि शुरुआती जांच में मामले को बंद करने की सिफारिश किन परिस्थितियों में की गई थी।इस घटनाक्रम के बीच दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों ए. अरुण और एन. कन्नन को भी कंपल्सरी वेट पर रखा गया है। इसके अलावा यास्मीन को वैकेंसी रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। ये प्रशासनिक कदम पिछली जांच के संचालन की समीक्षा के बीच उठाए गए हैं; इनसे अपने-आप किसी आपराधिक जिम्मेदारी का निष्कर्ष नहीं निकलता।
पुलिस ने जांच के दौरान वीरमणि से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी भी ली है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीमों ने उनके कार्यालय और अन्य परिसरों समेत पांच स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनकी जांच के जरिए पुलिस मामले से जुड़े अतिरिक्त सबूत तलाश रही है।जांच के दौरान वीरमणि के एक पूर्व कर्मचारी गणेशन को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि उसके पास एक ऐसा वीडियो था जिसमें कथित तौर पर वीरमणि और एक नाबालिग लड़की दिखाई दे रहे थे। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो उसके पास कैसे पहुंचा और उसने इसकी जानकारी अधिकारियों को क्यों नहीं दी।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब यह है कि SIT न केवल मूल आरोपों की जांच करेगी बल्कि पहले की जांच के दौरान सबूतों को संभालने और मामले को आगे बढ़ाने के तरीके की भी समीक्षा करेगी। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि शुरुआती जांच में क्या हुआ था और मामले को बंद करने की अनुमति मांगने का आधार क्या था।चार वरिष्ठ महिला अधिकारियों की SIT बनने के बाद अब पूरे मामले की नए सिरे से विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस के सामने कथित पीड़िताओं के बयान, डिजिटल साक्ष्य और पहले जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका जैसे कई पहलू हैं। वीरमणि और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और उनकी आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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