तमिलनाडू

अंबत्तूर की 5 वर्षीय बच्ची की मौत मामले में मेडिकल लापरवाही की जांच तेज

Kavita2
15 July 2026 9:18 AM IST
अंबत्तूर की 5 वर्षीय बच्ची की मौत मामले में मेडिकल लापरवाही की जांच तेज
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चेन्नई : चेन्नई के अंबत्तूर क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची की कथित मेडिकल लापरवाही के कारण हुई मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर मामले में शामिल दो निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एंड रूरल हेल्थ सर्विसेज (DMRHS) ने तमिलनाडु स्टेट मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखकर संबंधित डॉक्टरों के आचरण और उपचार प्रक्रिया की जांच कर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

इस मामले में मेडिकल काउंसिल ने दोनों डॉक्टरों को समन जारी कर जांच के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि निर्धारित तिथि पर एक डॉक्टर के उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई और जांच की कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अब मेडिकल काउंसिल जल्द नई तारीख तय कर दोनों पक्षों की सुनवाई करेगी।

जानकारी के अनुसार, अट्टीपट्टू क्षेत्र के रहने वाले शिनू अलेक्जेंडर और उनकी पत्नी जीशा की पांच वर्षीय बेटी को 3 दिसंबर को तेज बुखार की शिकायत होने पर अंबत्तूर स्थित तेजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि बच्ची को सामान्य बुखार था और समय पर इलाज मिलने की उम्मीद में उसे अस्पताल ले जाया गया था।

परिवार का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद बच्ची की स्थिति लगातार बिगड़ती गई, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को समय पर नहीं पहचाना। उनका दावा है कि इलाज में लापरवाही बरती गई और आवश्यक चिकित्सकीय जांच तथा उपचार समय पर नहीं किया गया। अगले ही दिन, 4 दिसंबर को बच्ची की मौत हो गई।

बेटी की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज करने वाले डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते उचित उपचार मिलता तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की।

शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू की। उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एंड रूरल हेल्थ सर्विसेज ने प्रारंभिक स्तर पर मामला गंभीर मानते हुए तमिलनाडु स्टेट मेडिकल काउंसिल को विस्तृत रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में संबंधित डॉक्टरों के पेशेवर आचरण और उपचार प्रक्रिया की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई।

इसके बाद मेडिकल काउंसिल ने मामले में शामिल दो निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा। काउंसिल का उद्देश्य दोनों डॉक्टरों का पक्ष सुनना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह तय करना है कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं।

हालांकि निर्धारित तिथि पर एक डॉक्टर जांच समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और जांच की प्रक्रिया को अगली तारीख तक के लिए स्थगित करना पड़ा। काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में यह साबित होता है कि डॉक्टरों ने चिकित्सा मानकों का उल्लंघन किया है या इलाज में गंभीर लापरवाही बरती है, तो उनके खिलाफ मेडिकल काउंसिल के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनी, पंजीकरण पर कार्रवाई या अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में केवल मरीज की मृत्यु होना ही पर्याप्त आधार नहीं होता, बल्कि यह भी जांचना आवश्यक होता है कि क्या डॉक्टर ने स्वीकृत चिकित्सा मानकों के अनुसार उपचार किया था। मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दवाओं का विवरण और उपचार की समय-सीमा जैसे सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाता है।

इस घटना ने निजी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वहीं, बच्ची के परिजन अब भी न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो भविष्य में अन्य परिवारों को ऐसी त्रासदी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

फिलहाल तमिलनाडु स्टेट मेडिकल काउंसिल ने मामले की जांच जारी रखने का निर्णय लिया है। जल्द ही नई तारीख तय कर दोनों डॉक्टरों को दोबारा उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही, मरीजों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें मेडिकल काउंसिल की अगली सुनवाई और उसके अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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