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Chennai चेन्नई: वैश्विक डायमंड उद्योग से जुड़ी कंपनी De Beers के अनुसार भारत वर्ष 2025 तक चीन और जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेचुरल डायमंड ज्वेलरी मार्केट बनने की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव वैश्विक मांग के रुझानों में आ रहे बदलाव को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत का नेचुरल डायमंड ज्वेलरी बाजार वर्तमान में लगभग 49,700 करोड़ रुपये का है। आने वाले वर्षों में इसमें तेज़ वृद्धि की संभावना जताई गई है और अनुमान है कि यह बाजार 2030 तक बढ़कर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
वैश्विक स्तर पर डायमंड ज्वेलरी की कुल मांग लगभग 44 अरब डॉलर आंकी गई है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी अब 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जो देश में उपभोक्ता मांग और खर्च करने की क्षमता में वृद्धि को दर्शाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका अभी भी इस क्षेत्र में सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है। हालांकि, एशिया के अन्य बड़े बाजारों जैसे चीन और जापान में मांग में कमी देखी गई है। इसके चलते इन दोनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर लगभग 5 प्रतिशत रह गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में डायमंड ज्वेलरी की मांग में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इसमें मध्यम वर्ग की आय में वृद्धि, शहरीकरण, शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान बढ़ती खरीदारी, और ब्रांडेड ज्वेलरी की ओर झुकाव शामिल है। इसके अलावा, युवा उपभोक्ताओं के बीच डायमंड ज्वेलरी को लेकर रुचि बढ़ी है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि संगठित रिटेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विस्तार ने भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया है। ग्राहकों को अब विभिन्न डिजाइनों और कीमतों में अधिक विकल्प मिल रहे हैं, जिससे बाजार का विस्तार हो रहा है।
वहीं चीन और जापान में मांग में गिरावट के पीछे आर्थिक कारणों और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव को प्रमुख माना जा रहा है। इन बाजारों में खर्च में कमी और प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण डायमंड ज्वेलरी की मांग प्रभावित हुई है।
भारत के लिए यह बदलाव एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो देश वैश्विक डायमंड बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में निवेश और विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियां इस बढ़ते बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकती हैं।
कुल मिलाकर, भारत का डायमंड ज्वेलरी बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 2025 तक दूसरे स्थान पर पहुंचने और 2030 तक बड़े स्तर पर वृद्धि के अनुमान इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
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