तमिलनाडू

वृद्धाश्रम बढ़ना चिंता की बात: Governor

Kavita2
29 Jun 2026 9:29 AM IST
वृद्धाश्रम बढ़ना चिंता की बात: Governor
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Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित नए 'अतुल्य' जेरियाट्रिक अस्पताल का रविवार को उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने अस्पताल का उद्घाटन कर इसे आम लोगों के लिए समर्पित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बुजुर्गों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं और समाज की जिम्मेदारी पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए चिंता का विषय है।

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अक्सर वृद्धाश्रमों के बारे में सुना है, लेकिन "बुजुर्गों की भलाई" जैसे विचार को समाज में उतनी प्रमुखता से नहीं देखा जाता। उनके अनुसार, इस प्रकार के अस्पताल और संस्थान समाज को यह समझाने का काम करते हैं कि बुजुर्गों की देखभाल केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के लोगों की आवश्यकताएं सामान्य चिकित्सा सेवाओं से अलग होती हैं। इसलिए जेरियाट्रिक चिकित्सा यानी बुजुर्गों के इलाज और देखभाल से जुड़े चिकित्सा पाठ्यक्रमों को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ेगी तो बुजुर्गों को बेहतर इलाज और देखभाल मिल सकेगी।

राज्यपाल ने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है और यह देश के लिए गर्व की बात है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ आज के युवा भी बुजुर्ग बनेंगे। इसलिए समाज को भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति को वृद्धावस्था में सम्मान और सुरक्षा मिल सके।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि बुजुर्गों को अकेलापन महसूस न होने दें और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करें।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में यह चर्चा का विषय बन गया है कि कई परिवारों में युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि पारिवारिक मूल्यों और आपसी सम्मान को बनाए रखना आवश्यक है ताकि बुजुर्ग स्वयं को परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करें।

उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रमों की संख्या लगातार बढ़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि समाज और परिवारों के सामने नई सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में केवल नए वृद्धाश्रम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके बजाय परिवारों और समाज में ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां बुजुर्ग अपने घर और परिवार के बीच सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग भी बुजुर्गों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि परिवार और समाज उनका साथ दें तो उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए।

'अतुल्य' जेरियाट्रिक अस्पताल के उद्घाटन को उन्होंने एक सकारात्मक पहल बताया। उनके अनुसार इस प्रकार के विशेष अस्पताल बुजुर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था को भी उसी अनुरूप तैयार करना होगा। जेरियाट्रिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है और इस परंपरा को आगे भी मजबूत बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों की देखभाल करें और ऐसा समाज बनाने में योगदान दें, जहां हर वरिष्ठ नागरिक सम्मान, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ जीवन जी सके।

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