तमिलनाडू

ACF मौत मामले में IFS अधिकारी सस्पेंड

Kavita2
2 Aug 2026 9:27 AM IST
ACF मौत मामले में IFS अधिकारी सस्पेंड
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भुवनेश्वर। ओडिशा में असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के चर्चित मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी संग्राम केशरी बेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। बेहरा वर्तमान में ओडिशा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (OFDC) में डायरेक्टर (कमर्शियल) के पद पर कार्यरत थे। मुख्यमंत्री का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब बेहरा ने अदालत में आत्मसमर्पण किया और उनकी जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

राज्य सरकार की इस कार्रवाई को मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस प्रकरण में हालिया घटनाक्रम के बाद सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, 27 जुलाई को गजपति जिले के पूर्व डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) संग्राम केशरी बेहरा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से परलाखेमुंडी स्थित सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। अदालत में पेश होने के बाद उन्होंने नियमित जमानत की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए SDJM कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

इसके बाद बेहरा ने राहत पाने के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी अपील को अस्वीकार कर दिया। दोनों अदालतों से जमानत नहीं मिलने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।

इसी घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रशासनिक स्तर पर सख्त रुख अपनाते हुए संग्राम केशरी बेहरा को निलंबित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद संबंधित विभाग ने निलंबन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकारी सेवा नियमों के तहत किसी अधिकारी के न्यायिक हिरासत में जाने की स्थिति में निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है और इसी प्रावधान के तहत यह कदम उठाया गया है।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत का मामला पिछले कुछ समय से ओडिशा में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला सामने आने के बाद इसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है। मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर सरकार, न्यायालय और जांच एजेंसियों की लगातार नजर बनी हुई है। अब संग्राम केशरी बेहरा के आत्मसमर्पण, जमानत खारिज होने और निलंबन के बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है और जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही की जाएगी। विभागीय स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है ताकि सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सरकारी अधिकारी का निलंबन दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता, बल्कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिससे जांच और न्यायिक कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। अंतिम निर्णय अदालत के फैसले और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मामले पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। विभिन्न संगठनों और नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सरकार ने भी संकेत दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। संग्राम केशरी बेहरा का निलंबन प्रशासनिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जबकि न्यायिक प्रक्रिया अपनी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर इस मामले में और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

फिलहाल, बेहरा न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि सार्वजनिक सेवा से जुड़े किसी भी अधिकारी के खिलाफ यदि गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो कानून और सेवा नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस मामले पर अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

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