तमिलनाडू

पलानी मुरुगन मंदिर की 100 करोड़ की जमीन पर HCका बड़ा फैसला

Kavita2
16 July 2026 10:26 AM IST
पलानी मुरुगन मंदिर की 100 करोड़ की जमीन पर HCका बड़ा फैसला
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चेन्नई: चेन्नई हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने पलानी मुरुगन मंदिर ट्रस्ट की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम गैर-कानूनी तरीके से दर्ज किए जाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने जमीन के निजी मालिकों के नाम किए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले को मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह आदेश पलानी अरुलमिगु दंडायुधापानी स्वामी मंदिर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। याचिका में मंदिर ट्रस्ट की जमीन को नियमों के विरुद्ध निजी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित किए जाने को चुनौती दी गई थी।

मंदिर प्रशासन ने अदालत में उठाया मामला

मंदिर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि पलानी मुरुगन मंदिर ट्रस्ट की संपत्ति को बिना उचित अधिकार और कानूनी प्रक्रिया के निजी व्यक्तियों के नाम रजिस्टर कर दिया गया। याचिका में इस रजिस्ट्रेशन को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई थी।

मंदिर प्रशासन का तर्क था कि धार्मिक संस्थानों की संपत्तियां श्रद्धालुओं और मंदिर के धार्मिक कार्यों से जुड़ी होती हैं। ऐसी संपत्तियों का किसी भी निजी व्यक्ति के नाम हस्तांतरण नियमों के खिलाफ है। इसलिए संबंधित रजिस्ट्रेशन को निरस्त किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने माना रजिस्ट्रेशन गैर-कानूनी

मामले की सुनवाई के दौरान मदुरै बेंच ने दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि मंदिर ट्रस्ट की जमीन को निजी नामों पर दर्ज करने की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

इसके बाद कोर्ट ने निजी मालिकों के नाम किए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का आदेश जारी किया। अदालत के इस फैसले से मंदिर प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।

करोड़ों की संपत्ति की सुरक्षा का मामला

पलानी मुरुगन मंदिर तमिलनाडु के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के पास मौजूद संपत्तियां धार्मिक और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मंदिर की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े इस मामले ने धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए थे। अदालत के फैसले के बाद ऐसी संपत्तियों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है।

मंदिर संपत्तियों के संरक्षण पर जोर

देशभर में कई बड़े मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के पास बड़ी मात्रा में जमीन और अन्य संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों के प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। अदालतें समय-समय पर यह स्पष्ट करती रही हैं कि धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, मंदिरों की संपत्तियों को अवैध तरीके से हस्तांतरित करने के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित विभागों को जमीन के रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव करने होंगे। अदालत के फैसले के अनुसार निजी नामों पर किए गए रजिस्ट्रेशन को हटाकर संपत्ति को फिर से मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।

मंदिर प्रशासन की ओर से इस फैसले का स्वागत किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा और उचित प्रबंधन उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

पलानी मुरुगन मंदिर की 100 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस मामले में मदुरै बेंच का फैसला धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अदालत के आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि मंदिरों और ट्रस्टों की संपत्तियों को नियमों के विरुद्ध निजी हितों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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