तमिलनाडू

उदयनिधि स्टालिन समेत कई MLA को हाईकोर्ट का नोटिस

Kavita2
11 July 2026 8:59 AM IST
उदयनिधि स्टालिन समेत कई MLA को हाईकोर्ट का नोटिस
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चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़े कई चुनावी विवादों पर सुनवाई करते हुए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन समेत कई वर्तमान और पूर्व विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाली विभिन्न चुनाव याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।

इन चुनाव याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं हुईं, जिसके कारण चुनाव परिणामों को रद्द किया जाना चाहिए। अदालत ने फिलहाल किसी भी मामले में चुनाव परिणामों पर कोई टिप्पणी नहीं की है और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

सबसे प्रमुख मामला चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां डीएमके नेता और वर्तमान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने चुनाव जीत दर्ज की थी। उनकी जीत को चुनौती देते हुए मिलानी नामक याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में उदयनिधि स्टालिन के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उदयनिधि स्टालिन को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसी प्रकार कन्याकुमारी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित दो अलग-अलग चुनाव याचिकाएं भी अदालत के समक्ष लंबित हैं। इनमें डीएमके उम्मीदवार महेश और अन्नाद्रमुक (AIADMK) उम्मीदवार सुभा खान ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर अन्नाद्रमुक विधायक थलवाई सुंदरम की चुनावी जीत को चुनौती दी है। दोनों याचिकाओं में चुनाव परिणाम रद्द करने और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है।

रॉयपुरम विधानसभा क्षेत्र में भी चुनाव परिणाम को लेकर विवाद सामने आया है। डीएमके उम्मीदवार सुभा खान ने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र से विजयी उम्मीदवार विजय दामू की जीत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। अदालत ने इस मामले में भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

करूर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मामले में डीएमके उम्मीदवार ने पूर्व अन्नाद्रमुक विधायक एम.आर. विजयभास्कर की चुनावी जीत को चुनौती दी है। याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिनकी न्यायिक जांच आवश्यक है। हालांकि एम.आर. विजयभास्कर बाद में विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन चुनाव परिणाम की वैधता को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी।

विरालीमालाई विधानसभा क्षेत्र में डीएमके उम्मीदवार टी. परिवाल ने अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर की जीत को अदालत में चुनौती दी है। याचिका में चुनाव परिणाम को निरस्त करने की मांग करते हुए कई कानूनी आधार प्रस्तुत किए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में भी सी. विजयभास्कर से जवाब दाखिल करने को कहा है।

इसी तरह लालगुडी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित चुनाव याचिका में अन्नाद्रमुक की विधायक लीमा रोज मार्टिन की जीत को चुनौती दी गई है। डीएमके उम्मीदवार के.के. चेल्लापांडियन ने अदालत में याचिका दायर कर चुनाव परिणाम को अमान्य घोषित करने की मांग की है। अदालत ने लीमा रोज मार्टिन को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा चुनाव कानूनों के तहत उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि इस स्तर पर किसी भी याचिका के गुण-दोष पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

गौरतलब है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव के परिणाम को केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। यदि अदालत को चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, गलत जानकारी, भ्रष्ट आचरण या अन्य कानूनी उल्लंघन के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो वह संबंधित निर्वाचन को निरस्त करने का आदेश दे सकती है। हालांकि ऐसा निर्णय विस्तृत सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही लिया जाता है।

फिलहाल मद्रास उच्च न्यायालय ने सभी संबंधित नेताओं और विधायकों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इन मामलों में अगली सुनवाई के दौरान अदालत जवाबों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करेगी। इन चुनाव याचिकाओं पर आने वाला फैसला तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि इनमें राज्य के कई प्रमुख नेताओं और विधायकों के निर्वाचन की वैधता का प्रश्न जुड़ा हुआ है।

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