
कुड्डालोर: तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में चिदंबरम से सलेम जा रही एक सरकारी बस बीच रास्ते अचानक खराब हो जाने से 40 से अधिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस वेप्पुर (वेपुर) क्षेत्र के पास मैकेनिकल खराबी के कारण सड़क के बीचोंबीच रुक गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। बाद में बस को सड़क के किनारे हटाकर यात्रियों को दूसरी सरकारी बसों के माध्यम से उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम की एक सरकारी बस चिदंबरम से सलेम के लिए रवाना हुई थी। बस का निर्धारित मार्ग वेप्पुर होते हुए सलेम तक का था। यात्रा के दौरान बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें छात्र, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य दैनिक यात्री शामिल थे।
यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन जैसे ही बस वेप्पुर क्षेत्र के पास पहुंची, उसमें अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इंजन में आई समस्या के कारण बस बीच सड़क पर ही रुक गई और आगे नहीं बढ़ सकी। अचानक बस रुकने से यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
बस चालक और परिचालक ने मौके पर ही बस को दोबारा चालू करने का प्रयास किया। उन्होंने कई बार इंजन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी खराबी दूर नहीं हो सकी। काफी देर तक प्रयास करने के बावजूद जब बस चालू नहीं हुई तो यात्रियों ने भी चालक और परिचालक की मदद के लिए बस को धक्का लगाकर स्टार्ट करने की कोशिश की। हालांकि यह प्रयास भी सफल नहीं हो सका और बस वहीं खड़ी रही।
इस दौरान सड़क पर अन्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। स्थिति को देखते हुए चालक और स्थानीय लोगों की मदद से बस को सड़क के बीच से हटाकर किनारे लगाया गया, ताकि यातायात सामान्य बना रहे और जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।
बस के पूरी तरह खराब हो जाने के बाद परिवहन विभाग को इसकी सूचना दी गई। कुछ समय बाद उसी मार्ग से गुजर रही अन्य सरकारी बसों को रोका गया और खराब बस में फंसे यात्रियों को उनमें बैठाकर उनके गंतव्य की ओर भेजा गया। हालांकि सभी यात्रियों को तुरंत बस नहीं मिल सकी, जिसके कारण कई लोगों को सड़क किनारे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
इस घटना से सबसे अधिक परेशानी छात्रों, बुजुर्गों और महिलाओं को हुई। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें तेज धूप और गर्म मौसम में सड़क किनारे काफी देर तक खड़ा रहना पड़ा। जिन यात्रियों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना था, उनकी यात्रा भी काफी देर से पूरी हो सकी।
यात्रियों ने इस घटना के बाद सरकारी बसों की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि राज्य परिवहन निगम की कई बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं और उनका नियमित रखरखाव नहीं किया जाता। इसी कारण बीच रास्ते बसों के खराब होने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पुराने और जर्जर वाहनों को सड़कों पर चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर बसों की तकनीकी जांच और मरम्मत की जाए तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
स्थानीय लोगों ने भी कहा कि सार्वजनिक परिवहन पर बड़ी संख्या में लोग निर्भर हैं। ऐसे में बसों की नियमित सर्विसिंग और फिटनेस जांच सुनिश्चित करना परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। यदि बसें बीच रास्ते खराब होती रहेंगी तो यात्रियों का भरोसा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर कम हो सकता है।
हालांकि इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, लेकिन समय पर बस खराब होने के कारण संभावित दुर्घटना टल गई। यदि यह तकनीकी खराबी किसी व्यस्त हाईवे या तेज रफ्तार वाले हिस्से में होती, तो स्थिति अधिक गंभीर हो सकती थी।
यात्रियों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि पुराने वाहनों की समय पर मरम्मत कराई जाए और उनकी तकनीकी जांच नियमित रूप से की जाए। साथ ही जिन बसों की स्थिति अत्यधिक खराब है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई और आधुनिक बसों को सेवा में शामिल किया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और समयबद्ध यात्रा की सुविधा मिल सके।
फिलहाल परिवहन विभाग की ओर से बस में आई तकनीकी खराबी के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और बसों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।





