तमिलनाडू

नाबालिगों से जुड़े मामले में तीन आरोपियों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई

Ratna Netam
1 Oct 2026 6:45 PM IST
नाबालिगों से जुड़े मामले में तीन आरोपियों पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई
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चेन्नई। नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े एक POCSO मामले में गिरफ्तार जेम ग्रेनाइट्स के मालिक आर. वीरमणि और दो अन्य आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार वीरमणि के साथ शांति और महेंद्र सिम्हन पर भी ‘गुंडा एक्ट’ के तहत कार्रवाई की गई है। तीनों को पहले ही POCSO मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है और अब उनके खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए गए हैं।
पुलिस ने गुरुवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी। चेन्नई शहर के पुलिस कमिश्नर ने आर. वीरमणि, शांति और महेंद्र सिम्हन के खिलाफ एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए हैं। इसके बाद तीनों आरोपियों को गुंडा एक्ट के प्रावधानों के तहत हिरासत में रखा जाएगा।
मामला नाबालिगों के खिलाफ कथित यौन अपराधों से जुड़ा हुआ है। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु पुलिस की ओर से एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। SIT अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपों से जुड़े साक्ष्यों तथा अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक जेम ग्रेनाइट्स के मालिक आर. वीरमणि का नाम इस मामले में सामने आने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। इसी मामले में शांति और महेंद्र सिम्हन को भी गिरफ्तार किया गया। तीनों पर नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद सामने आएगा।
चेन्नई पुलिस कमिश्नर की ओर से जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन आदेश के बाद मामला और गंभीर हो गया है। एहतियाती हिरासत का इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब अधिकारियों को लगता है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों को रोकना आवश्यक है। इस मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाने का फैसला किया है।
मामले में तमिलनाडु पुलिस की SIT अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपों से संबंधित घटनाक्रम कैसे हुआ, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। SIT के सामने अब आरोपियों से संबंधित सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी है।
POCSO कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है। इस तरह के मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियों को संवेदनशीलता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी होती है। इसी कारण इस मामले में भी आरोप सामने आने के बाद गिरफ्तारी के साथ-साथ विशेष जांच टीम को जांच की जिम्मेदारी दी गई।
पुलिस की ओर से गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने के बाद अब तीनों आरोपियों की हिरासत को लेकर अलग कानूनी प्रक्रिया चलेगी। आर. वीरमणि, शांति और महेंद्र सिम्हन के खिलाफ जारी आदेश में एहतियाती हिरासत की व्यवस्था की गई है। पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से देख रहा है।
हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि तीनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल सभी को आरोपी के रूप में देखा जा रहा है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।
SIT की जांच में आरोपियों के संपर्क, घटना से जुड़े दस्तावेज, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य संभावित गवाहों की जानकारी जुटाई जा सकती है। पुलिस यह भी देख रही है कि पूरे घटनाक्रम में कहीं कोई व्यापक नेटवर्क या अन्य व्यक्ति तो शामिल नहीं हैं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जेम ग्रेनाइट्स के मालिक आर. वीरमणि के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाए जाने के कारण मामला चर्चा में आ गया है। उनके साथ शांति और महेंद्र सिम्हन पर भी समान कार्रवाई की गई है। तीनों पहले से POCSO मामले में गिरफ्तार हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। SIT की जांच पूरी होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। अभी पुलिस का ध्यान आरोपों की तह तक जाने, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करने पर है।
फिलहाल चेन्नई पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद आर. वीरमणि, शांति और महेंद्र सिम्हन के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत एहतियाती हिरासत लागू कर दी गई है। POCSO मामले की जांच SIT कर रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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