
चेन्नई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ एस अब चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हो गए हैं। कंपनी ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती निजी भागीदारी के बीच डॉ. सोमनाथ का इस स्टार्टअप से जुड़ना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. सोमनाथ ने जनवरी 2025 तक ISRO के चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों की निगरानी की। इनमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग और देश की पहली सौर वेधशाला मिशन आदित्य-L1 का प्रक्षेपण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों को मिलेगा मार्गदर्शन
अग्निकुल कॉसमॉस भारत की उभरती हुई निजी अंतरिक्ष कंपनियों में से एक है, जो छोटे उपग्रहों के लिए लॉन्च व्हीकल विकसित करने पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य कम लागत और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष तक पहुंच को आसान बनाना है।
डॉ. सोमनाथ के जुड़ने से कंपनी को अंतरिक्ष मिशनों, रॉकेट तकनीक, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष उद्योग से जुड़े उनके लंबे अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। उनके मार्गदर्शन से कंपनी की तकनीकी और रणनीतिक योजनाओं को मजबूती मिल सकती है।
चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 मिशन में रही अहम भूमिका
डॉ. सोमनाथ का ISRO में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। उन्होंने भारत के कई प्रमुख अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में चंद्रयान-3 मिशन ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की, जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना।
इसके अलावा आदित्य-L1 मिशन भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। यह भारत का पहला अंतरिक्ष आधारित सौर अध्ययन मिशन है, जिसका उद्देश्य सूर्य की गतिविधियों और उसके प्रभावों का अध्ययन करना है।
अग्निकुल कॉसमॉस की बढ़ती पहचान
चेन्नई स्थित अग्निकुल कॉसमॉस की स्थापना अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। कंपनी छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए लॉन्च व्हीकल विकसित कर रही है।
कंपनी का प्रमुख प्रोजेक्ट अग्निबाण रॉकेट है, जिसे छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए डिजाइन किया जा रहा है। यह रॉकेट आधुनिक तकनीक और 3डी प्रिंटेड इंजन जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए चर्चा में रहा है।
भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद अग्निकुल जैसी कंपनियों को नई संभावनाएं मिली हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी से देश के अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में तेजी आई है।
बोर्ड में ऑब्जर्वर की भूमिका महत्वपूर्ण
कंपनी बोर्ड में ऑब्जर्वर के तौर पर डॉ. सोमनाथ की भूमिका सलाह और रणनीतिक मार्गदर्शन से जुड़ी होगी। हालांकि ऑब्जर्वर के पास आमतौर पर निदेशक की तरह मतदान अधिकार नहीं होते, लेकिन वे बोर्ड की चर्चाओं में महत्वपूर्ण सुझाव और विशेषज्ञ राय दे सकते हैं।
अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उनका योगदान कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के स्पेस इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
भारत में पिछले कुछ वर्षों में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सरकार की नीतियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के कारण कई स्टार्टअप रॉकेट, उपग्रह और अंतरिक्ष सेवाओं के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ISRO के अनुभवी वैज्ञानिकों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग से भारत का स्पेस इकोसिस्टम और मजबूत होगा। इससे नई तकनीकों के विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डॉ. सोमनाथ का अग्निकुल कॉसमॉस से जुड़ना ऐसे समय में हुआ है, जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। उनके अनुभव और विशेषज्ञता से कंपनी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है और यह कदम देश के अंतरिक्ष उद्योग के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।





