तमिलनाडू

तमिलनाडु कांग्रेस के 5 MLA हैदराबाद में, सरकार गठन की राजनीति तेज

Kavita2
9 May 2026 9:22 AM IST
तमिलनाडु कांग्रेस के 5 MLA हैदराबाद में, सरकार गठन की राजनीति तेज
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां कांग्रेस के पांच विधायक हैदराबाद में रखे जाने की खबर ने सियासी हलचल तेज कर दी है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब राज्य में सरकार गठन और बहुमत साबित करने को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने पहले डीएमके गठबंधन से अलग होने का निर्णय लिया और इसके बाद टीडीपी को समर्थन देने की बात सामने आई। इस बदलाव के बाद राजनीतिक स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के पांच विधायकों में विश्वनाथन, राजेश कुमार, जमाल मोहम्मद यूनिस, ताराकई कथबर्ट और टी.डी. प्रवीण शामिल हैं। इन विधायकों के समर्थन के बाद दावा किया जा रहा है कि टीडीपी को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 112 तक पहुंच गई है, जिससे सरकार गठन की स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।

इसी बीच, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तमिलनाडु कांग्रेस के इन पांच विधायकों को हैदराबाद ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि जहां तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है, वहां उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या संपर्क से बचाया जा सके। हालांकि इस मामले में पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

उधर, दूसरी ओर एआईएडीएमके के विधायकों को भी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। जानकारी के अनुसार, उन्हें पुडुचेरी के एक लग्जरी होटल में ठहराया गया है। इस कदम को भी राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित बहुमत परीक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की सत्ता राजनीति को एक नए मोड़ पर ला दिया है। एक ओर जहां दल बदल और समर्थन की स्थिति बदल रही है, वहीं दूसरी ओर विधायकों की सुरक्षा और उनके ठहराव को लेकर भी रणनीतिक फैसले लिए जा रहे हैं।

सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच विधायकों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाना यह संकेत देता है कि राजनीतिक दल अपने-अपने समर्थकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे राज्य में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

हालांकि अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने आधिकारिक रूप से सरकार गठन को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन विधायकों की संख्या और समर्थन के दावों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि किसके पक्ष में बहुमत जाता है और राज्य में सरकार गठन की दिशा क्या होगी।

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