
रामेश्वरम : श्रीलंका की नौसेना द्वारा गिरफ्तार किए गए भारतीय मछुआरों की रिहाई की मांग को लेकर तमिलनाडु के रामेश्वरम के मछुआरों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में मछुआरों ने समुद्र में नहीं उतरने का फैसला करते हुए हड़ताल जारी रखी और केंद्र तथा राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर गिरफ्तार मछुआरों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
मछुआरों के संगठनों का कहना है कि जब तक श्रीलंका की जेल में बंद सभी भारतीय मछुआरों को सुरक्षित रिहा नहीं किया जाता और उनकी नौकाओं को वापस नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के कारण रामेश्वरम मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पर सन्नाटा पसरा रहा और सैकड़ों मशीनीकृत नौकाएं किनारे पर ही खड़ी रहीं।
जानकारी के अनुसार, रामेश्वरम के 2,500 से अधिक मछुआरे लगभग 400 हॉर्सपावर वाली मशीनीकृत नौकाओं के जरिए मत्स्य विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर गत बुधवार (22 जुलाई) की सुबह समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकले थे। मछुआरों का कहना है कि वे नियमित रूप से निर्धारित क्षेत्र में मछली पकड़ने का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान श्रीलंका की नौसेना ने उन्हें समुद्री सीमा पार कर मछली पकड़ने का आरोप लगाते हुए रोक लिया।
श्रीलंका की नौसेना ने कार्रवाई करते हुए नौ भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए मछुआरों की पहचान मलिकदीना (63), गयास (31), सेंथिल (41), कृथिसन (41), प्रवीण (46), अरुल लोयोला (43), सबरी विनोथविन (42), देवसहायम (39) और इनबेस्ट प्रसाद (36) के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद सभी मछुआरों को श्रीलंका ले जाया गया, जहां उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ववुनिया जेल भेज दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान श्रीलंका की अदालत ने सभी नौ मछुआरों को 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद मछुआरों के परिजनों और रामेश्वरम के मत्स्य समुदाय में चिंता और बढ़ गई है। परिवारों का कहना है कि उनके घरों की आजीविका पूरी तरह मछली पकड़ने पर निर्भर है और परिवार के कमाने वाले सदस्य के जेल में होने से आर्थिक संकट गहरा गया है।
हड़ताल में शामिल मछुआरों ने आरोप लगाया कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है, जिसके कारण समय-समय पर भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी होती रहती है। उनका कहना है कि समुद्र में मछलियों की उपलब्धता और पारंपरिक मत्स्य क्षेत्रों के कारण कई बार मछुआरे अनजाने में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के निकट पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए गिरफ्तार मछुआरों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे को श्रीलंका सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि गिरफ्तार मछुआरों के साथ जब्त की गई नौकाओं को भी जल्द वापस दिलाया जाए, क्योंकि नौकाएं ही उनके रोजगार का मुख्य साधन हैं।
रामेश्वरम क्षेत्र में मछली पकड़ना हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में लगातार होने वाली गिरफ्तारियों और नौकाओं की जब्ती से मछुआरों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। कई परिवार कर्ज लेकर नौकाएं खरीदते हैं और उनकी आय पूरी तरह समुद्र में होने वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निर्भर रहती है। हड़ताल के चलते स्थानीय मछली बाजारों और इससे जुड़े व्यापार पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और मछुआरा संगठनों ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा विवाद तथा मछुआरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान समय की मांग है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच नियमित वार्ता, समुद्री सीमाओं के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने से इस तरह की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
फिलहाल रामेश्वरम के मछुआरे अपने साथियों की सुरक्षित रिहाई की मांग पर अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक श्रीलंका की जेल में बंद सभी भारतीय मछुआरे स्वदेश वापस नहीं लौट आते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। मछुआरा समुदाय को अब केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ठोस पहल तथा भारत-श्रीलंका के बीच राजनयिक प्रयासों से सकारात्मक समाधान की उम्मीद है।





