
त्रिची : तमिलनाडु के त्रिची स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) सरकारी अस्पताल में गुरुवार सुबह एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब इलाज के दौरान भर्ती 65 वर्षीय महिला मरीज को वार्ड में चूहे ने काट लिया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और महिला को तत्काल अतिरिक्त चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया गया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, त्रिची के पोनमलईपट्टी क्षेत्र निवासी रतिनम की पत्नी तमिलकोडी (65) 10 जुलाई को घर में गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। हादसे में उनके पैर की हड्डी टूट गई थी, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए त्रिची के महात्मा गांधी मेमोरियल सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के बाद चिकित्सकों ने उनकी सर्जरी करने का निर्णय लिया और 20 जुलाई को उनके पैर का सफल ऑपरेशन किया गया।
सर्जरी के बाद तमिलकोडी अस्पताल के वार्ड में चिकित्सकों की निगरानी में उपचाराधीन थीं। गुरुवार सुबह जब वह अपने बिस्तर पर आराम कर रही थीं, तभी अचानक एक चूहा उनके पास पहुंच गया और उनके शरीर पर काट लिया। महिला के दर्द से चीखने पर वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों और परिजनों का ध्यान इस ओर गया। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों को तत्काल सूचना दी गई।
अस्पताल के चिकित्सा कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और महिला को प्राथमिक उपचार दिया। चिकित्सकों ने संक्रमण के खतरे को देखते हुए आवश्यक दवाएं दीं और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी शुरू कर दी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, महिला की हालत फिलहाल स्थिर है और उन्हें एहतियात के तौर पर विशेष चिकित्सा देखरेख में रखा गया है ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।
घटना की जानकारी मिलते ही मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यदि वार्डों में चूहों का इस तरह का आतंक हो तो मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में लंबे समय से सफाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण चूहों और अन्य जीव-जंतुओं की समस्या बनी रहती है।
इस घटना के बाद वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी चिंता का माहौल देखा गया। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन से वार्डों की नियमित सफाई, कीट एवं कृंतक नियंत्रण (रॉडेंट कंट्रोल) तथा स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि अस्पताल में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज रहते हैं, जिनके लिए इस तरह की घटनाएं संक्रमण का गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है। ऐसे में यदि किसी मरीज को चूहा काट ले, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए तत्काल उपचार, घाव की उचित सफाई, संक्रमण-रोधी दवाएं तथा चिकित्सकीय निगरानी अत्यंत आवश्यक होती है। साथ ही अस्पतालों में स्वच्छता और कृंतक नियंत्रण के मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वार्ड का निरीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों और संबंधित विभाग को वार्डों में विशेष अभियान चलाकर चूहों की समस्या पर नियंत्रण करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था की समीक्षा और संक्रमण नियंत्रण उपायों को और सुदृढ़ करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
महात्मा गांधी मेमोरियल सरकारी अस्पताल तमिलनाडु के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस प्रकार की घटना अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है और यह संकेत देती है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों में नियमित स्वच्छता निरीक्षण कराने, आधुनिक कृंतक नियंत्रण प्रणाली लागू करने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केवल तत्काल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और प्रभावी व्यवस्था भी आवश्यक है।
फिलहाल तमिलकोडी का इलाज जारी है और चिकित्सकों की एक टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। यह घटना स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।





