तमिलनाडू

तमिलनाडु में आम किसानों को राहत योजना का इंतजार

Kavita2
27 July 2026 9:17 AM IST
तमिलनाडु में आम किसानों को राहत योजना का इंतजार
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चेन्नई : तमिलनाडु के आम उत्पादक किसानों को राज्य और केंद्र सरकार की बाजार हस्तक्षेप (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम) योजना के तहत राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी होने में हो रही देरी के कारण हजारों किसान अब भी इस सहायता से वंचित हैं। सरकार की ओर से राज्य के आठ जिलों के आम किसानों के लिए 38 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पाने से किसानों में निराशा बढ़ रही है।

तमिलनाडु देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य में लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर भूमि पर आम की खेती की जाती है। यहां इमामबसंत, कलापाड़ी, पंगनपल्ली (चपट्टई), सेंथुरम (पालमनी), कल्लामई (थोट्टापुरी), कासा (नीलम), चक्रकुट्टी, कुट्टूस, सलेम कुंडू, माल्कोआ, अल्फोंसा, मल्लिकाई और नीलिसा जैसी अनेक किस्मों की खेती होती है। इनमें से कई किस्में घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

हालांकि, इस वर्ष खाने वाले आमों की अधिकांश किस्मों को बाजार में संतोषजनक कीमत मिल रही है, लेकिन कल्लामई (थोट्टापुरी) किस्म के किसानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यह किस्म मुख्य रूप से आम का पल्प, जूस, जैम और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने वाली उद्योग इकाइयों में उपयोग की जाती है। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इस किस्म का उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी उत्पादन लागत भी नहीं निकल पा रही है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, थोट्टापुरी आम की कीमत पूरी तरह प्रसंस्करण उद्योग की मांग पर निर्भर करती है। जब उद्योगों की खरीद कम होती है या बाजार में अधिक उत्पादन हो जाता है, तो कीमतों में भारी गिरावट आ जाती है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है। कई बार किसानों को मजबूरी में अपनी उपज लागत से भी कम दाम पर बेचनी पड़ती है।

इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने आठ जिलों के किसानों के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के तहत 38 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की थी। इस योजना का उद्देश्य बाजार मूल्य में भारी गिरावट आने पर किसानों को न्यूनतम समर्थन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। लेकिन योजना लागू करने के लिए आवश्यक अधिसूचना समय पर जारी नहीं होने से किसान इस राहत का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

किसान संगठनों का कहना है कि आम का मौसम सीमित अवधि का होता है। फल तैयार होने के बाद लंबे समय तक उसे खेतों में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में यदि सहायता योजना समय पर लागू नहीं होती तो उसके बाद मिलने वाली राहत का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। किसानों का कहना है कि सरकार की घोषणा तभी प्रभावी होगी जब सहायता राशि का लाभ आम की बिक्री के दौरान ही उपलब्ध कराया जाए।

तमिलनाडु के कई आम उत्पादक जिलों में किसानों ने बताया कि थोट्टापुरी किस्म की कीमत पिछले कुछ वर्षों से लगातार दबाव में है। उत्पादन लागत में मजदूरी, उर्वरक, सिंचाई, परिवहन और बागों के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ा है, लेकिन बाजार मूल्य उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। परिणामस्वरूप किसानों का लाभ घटता जा रहा है और कई बाग मालिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बाजार हस्तक्षेप योजना का उद्देश्य ऐसे ही समय में किसानों को सुरक्षा देना होता है। जब बाजार में कीमतें उत्पादन लागत से नीचे चली जाती हैं, तब सरकार हस्तक्षेप कर किसानों को राहत प्रदान करती है। लेकिन यदि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी हो जाए तो योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है।

किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि स्वीकृत 38 करोड़ रुपये की सहायता शीघ्र किसानों तक पहुंच सके। उनका कहना है कि यदि राहत समय पर नहीं मिली तो कई छोटे और सीमांत किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनकी क्रियान्वयन प्रक्रिया भी समयबद्ध बनाई जाए।

विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि थोट्टापुरी जैसी प्रसंस्करण आधारित किस्मों के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जानी चाहिए। राज्य में आम प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन देने, निर्यात बढ़ाने और किसानों को सीधे उद्योगों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव का कम सामना करना पड़े। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने से भी किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है।

राज्य सरकार का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता है और योजना से संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद पात्र किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

फिलहाल तमिलनाडु के आम उत्पादक किसान सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि राहत राशि की घोषणा स्वागतयोग्य है, लेकिन उसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब वह समय पर किसानों तक पहुंचे। किसानों को उम्मीद है कि सरकार शीघ्र अधिसूचना जारी कर बाजार हस्तक्षेप योजना को लागू करेगी, जिससे विशेष रूप से थोट्टापुरी आम उत्पादकों को आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

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