तमिलनाडू
तमिलनाडु में बिजली संकट और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भड़के ईपीएस
Ratna Netam
29 Oct 2026 3:26 PM IST

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चेन्नई : 29 अक्टूबर 2026। तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार और विपक्षी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर बिजली संकट, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार की कमजोर कार्यप्रणाली के कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासन लोगों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में असफल साबित हो रहा है।ईपीएस ने राज्य सरकार की कार्यशैली को प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण बताते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति, सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
बिजली संकट को लेकर विजय सरकार पर गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने तमिलनाडु में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार बिजली की बढ़ती मांग का अनुमान लगाने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।ईपीएस के अनुसार, बिजली कटौती का असर आम परिवारों के साथ-साथ किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और छोटे उद्योगों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में लगातार बाधा आने से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और लोगों की दैनिक परेशानियां बढ़ती हैं।पलानीस्वामी ने सरकार से सवाल किया कि बिजली संकट को दूर करने के लिए समय रहते प्रभावी योजना क्यों नहीं बनाई गई। उन्होंने जिलावार बिजली की मांग, उत्पादन और खरीद से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई थी।उनका कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
35 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीद पर उठाए सवाल
तमिलनाडु में बिजली खरीद को लेकर भी राजनीतिक विवाद गहराया हुआ है। पलानीस्वामी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निजी कंपनियों से लगभग 35 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद रही है, जो सामान्य खरीद दरों की तुलना में काफी अधिक है।उन्होंने इस खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार की खराब योजना और वित्तीय प्रबंधन के कारण बिजली वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु बिजली वितरण निगम ने 12 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच प्रतिदिन 4,400 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए पांच निजी कंपनियों के साथ अनुबंध किए थे।हालांकि, राज्य के ऊर्जा मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि बिजली की मांग बढ़ने और केंद्रीय उत्पादन संयंत्रों से अपेक्षित आपूर्ति कम होने के कारण अतिरिक्त खरीद जरूरी हुई। सरकार ने सस्ती बिजली के पुराने समझौते रद्द करने संबंधी आरोपों का भी खंडन किया है।
कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
बिजली संकट के अलावा पलानीस्वामी ने तमिलनाडु की कानून-व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधा है। उन्होंने राज्य में हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।ईपीएस का आरोप है कि सरकार अपराधों की रोकथाम के लिए पर्याप्त कदम उठाने के बजाय घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। केवल घोषणाएं करने से कानून-व्यवस्था बेहतर नहीं होगी, बल्कि पुलिस को आवश्यक संसाधन और प्रशासनिक सहयोग देना भी जरूरी है।पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री से पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। हालांकि, उनके आरोपों से राज्य में अपराध की वास्तविक प्रवृत्ति का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कावेरी जल विवाद पर भी प्रशासनिक निष्क्रियता का आरोप
ईपीएस ने कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कावेरी तकनीकी समिति के उपाध्यक्ष का पद चार महीने से अधिक समय तक खाली रहने के बावजूद सरकार ने नियुक्ति के लिए आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई।पलानीस्वामी के अनुसार, कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना जैसे संवेदनशील मामलों में तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने चेतावनी दी कि संबंधित पदों को खाली रखने से जल प्रबंधन से जुड़े मामलों में राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में कठिनाई हो सकती है।अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (AMMK) के नेता टीटीवी दिनाकरन ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए नियुक्तियों में देरी को चिंताजनक बताया है।
जनहित के मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाने की मांग
पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार को राजनीतिक प्रचार के बजाय बिजली, पानी, सार्वजनिक सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि AIADMK सरकार ने कठिन परिस्थितियों में भी जनकल्याण योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी थी।विपक्षी नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार नई योजनाएं शुरू करने के बजाय पुरानी योजनाओं के नाम बदलने और प्रचार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने राज्य की बढ़ती वित्तीय चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की है।दूसरी ओर, सत्तारूढ़ TVK सरकार बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति में आई कमी को वर्तमान संकट की प्रमुख वजह बता रही है। ऐसे में बिजली खरीद के खर्च, आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी सियासी हलचल
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठा रहा है। AIADMK के साथ अन्य विपक्षी दल भी बिजली खरीद, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।राजनीतिक जानकारों के लिए यह विवाद राज्य में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का संकेत है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और सरकार के जवाबों के बीच वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन आधिकारिक आंकड़ों तथा प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर ही किया जा सकता है।फिलहाल बिजली आपूर्ति, कानून-व्यवस्था और कावेरी जल प्रबंधन जैसे मुद्दे तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है, इस पर राजनीतिक दलों के साथ आम जनता की भी नजर रहेगी।
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