तमिलनाडू

अमरावती जंगल में हाथियों का संकट

Kavita2
2 July 2026 2:28 PM IST
अमरावती जंगल में हाथियों का संकट
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु और केरल सीमा से लगे उडुमलाई और अमरावती के जंगल क्षेत्रों में भीषण सूखे की स्थिति बनी हुई है। तेज गर्मी और बारिश की कमी के कारण यहां के जंगलों में रहने वाले जंगली हाथियों के झुंड पानी की तलाश में लगातार भटक रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि हाथियों के समूह अब जंगल के भीतर सीमित न रहकर आसपास के क्षेत्रों और जल स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं।

अनामलाई टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले उडुमलाई और अमरावती के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध माने जाते हैं। यहां बाघ, तेंदुए, हाथी, हिरण, जंगली भैंसे और लाल कुत्ते जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या हाथियों की है, जिनकी आबादी 300 से अधिक बताई जाती है। यह क्षेत्र लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

गर्मी की शुरुआत के साथ ही इस वर्ष जंगल क्षेत्रों में तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। पानी के स्रोत सूखने लगे हैं और प्राकृतिक झरनों में भी पानी की कमी देखी जा रही है। इसके चलते हाथियों के झुंड भोजन और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। आमतौर पर ये हाथी जंगल के भीतर ही सीमित रहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने उन्हें बाहरी क्षेत्रों की ओर जाने पर मजबूर कर दिया है।

पिछले कुछ दिनों से केरल सीमा के अंदर घूमने वाले हाथियों के झुंड अब तमिलनाडु सीमा की ओर बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। ये झुंड एस बेंड, कमानुथु, पूंगन ओडाई, चारो पट्टी और एझुमलाईयन मंदिर क्षेत्र जैसे इलाकों से गुजरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, ये हाथी विशेष रूप से पानी की तलाश में उडुमलाई–मुन्नार रोड पार कर अमरावती डैम की ओर जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों और वन अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की यह आवाजाही पहले भी होती थी, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर है क्योंकि पानी की उपलब्धता बेहद कम हो गई है। अमरावती डैम और आसपास के जल स्रोत हाथियों के लिए प्रमुख पेयजल स्थल माने जाते हैं, जहां वे गर्मियों के दौरान नियमित रूप से आते हैं।

आम तौर पर जून की शुरुआत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद जंगलों में जलस्तर बढ़ जाता है और डैम भर जाते हैं। इसके अलावा जंगलों में छोटे-छोटे झरने और जलधाराएं भी बन जाती हैं, जिससे वन्यजीवों को पर्याप्त पानी मिल जाता है। लेकिन इस वर्ष मानसून कमजोर रहने के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। बारिश की कमी से पूरे क्षेत्र में सूखा और गर्मी का असर बढ़ गया है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पानी की कमी के कारण हाथियों का व्यवहार भी प्रभावित हो रहा है और वे बड़े झुंड में अधिक दूरी तक यात्रा कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल हाथियों के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि मानव बस्तियों के नजदीक पहुंचने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ गई है।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल के आसपास के क्षेत्रों में सतर्क रहें और हाथियों के झुंड से दूरी बनाए रखें। वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जल स्रोतों की निगरानी के साथ-साथ आवश्यक स्थानों पर पानी की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून के कारण इस तरह की परिस्थितियां बार-बार सामने आ रही हैं। जंगलों में पानी की कमी न केवल हाथियों बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है। यदि समय रहते उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

फिलहाल उडुमलाई और अमरावती के जंगलों में हाथियों की लगातार आवाजाही जारी है और वन विभाग स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय है। प्रशासन का प्रयास है कि हाथियों को सुरक्षित रूप से पानी उपलब्ध कराया जाए और मानव बस्तियों से टकराव की स्थिति को रोका जाए।

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