तमिलनाडू

हाई कोर्ट के आदेश से टला चुनावी शेड्यूल विजय की छोड़ी सीट भी शामिल

Ratna Netam
24 Aug 2026 6:05 PM IST
हाई कोर्ट के आदेश से टला चुनावी शेड्यूल विजय की छोड़ी सीट भी शामिल
x
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इन सीटों पर लगी अंतरिम रोक को 8 सितंबर तक बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय को बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इनमें उनकी खाली की गई सीट भी शामिल है।
मद्रास हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब इन पांच विधानसभा क्षेत्रों में फिलहाल उपचुनाव नहीं हो पाएंगे। कोर्ट ने यह फैसला उन चुनाव याचिकाओं की सुनवाई के दौरान लिया, जिनमें विधानसभा चुनाव के परिणामों को चुनौती दी गई है। जब तक इन मामलों का निपटारा नहीं होता, तब तक चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा।
किन सीटों पर लगी रोक?
जिन पांच विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर रोक लगाई गई है, उनमें तिरुची ईस्ट, विरालीमलाई, पेरुंदुरई, अंबासमुद्रम और करूर सीट शामिल हैं। इन सीटों पर चुनाव परिणामों को लेकर अलग-अलग याचिकाएं अदालत में लंबित हैं। चुनाव आयोग ने भी हाई कोर्ट को बताया कि जब तक इन मामलों पर फैसला नहीं आता, तब तक उपचुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी।
इन सीटों में थलपति विजय की जीती हुई सीट भी शामिल है। विजय ने विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद नियमों के तहत उन्होंने एक सीट खाली कर दी थी, जिस पर उपचुनाव होना था। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस सीट पर चुनाव प्रक्रिया रुक गई है।
विजय सरकार को क्यों लगा झटका?
थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने हाई कोर्ट से चुनाव पर लगी रोक हटाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के फैसले के बाद पार्टी को अब लंबा इंतजार करना होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपचुनाव में जीत या हार का असर सीधे तौर पर सरकार की राजनीतिक ताकत और विपक्ष की रणनीति पर पड़ सकता था। हालांकि विजय सरकार के पास बहुमत की स्थिति मजबूत बताई जा रही है, लेकिन उपचुनाव राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे थे।
चुनावी नतीजों को चुनौती देने वाली याचिकाएं
मामले की जड़ विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल की गई चुनाव याचिकाएं हैं। कुछ उम्मीदवारों ने चुनाव प्रक्रिया और परिणामों को लेकर सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में चुनाव प्रचार, खर्च और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट इन्हीं मामलों की सुनवाई कर रहा है।
विजय के राजनीतिक सफर पर पहले भी चुनावी चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। अभिनेता से मुख्यमंत्री बने विजय के लिए सत्ता संभालने के बाद यह पहला बड़ा कानूनी और राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है।
एमके स्टालिन ने भी दायर की चुनाव याचिका
तमिलनाडु की राजनीति में विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने भी अपनी विधानसभा सीट को लेकर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की है। उन्होंने अपने क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग से जुड़े मुद्दों को आधार बनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
स्टालिन की याचिका के बाद तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी विवाद और तेज हो गया है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ही कानूनी लड़ाई के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर 8 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है। अदालत में लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि उपचुनाव कब होंगे। अगर कोर्ट से रोक हटती है तो चुनाव आयोग आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की एंट्री पहले ही बड़ा बदलाव मानी जा रही है। ऐसे में उनकी पार्टी के लिए हर चुनाव और हर कानूनी फैसला काफी महत्वपूर्ण हो गया है। हाई कोर्ट का ताजा आदेश भले ही अस्थायी है, लेकिन इसका राजनीतिक असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
फिलहाल पांच विधानसभा सीटों पर चुनावी गतिविधियां थम गई हैं और सभी पक्ष अब अदालत के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला आने वाले समय में भी चर्चा का केंद्र बना रहेगा।
Next Story