तमिलनाडू

अग्निवीरों के लिए बनेगी ड्रोन ट्रेनिंग लैब अक्टूबर से शुरू होगा प्रशिक्षण

Ratna Netam
29 Sept 2026 7:41 PM IST
अग्निवीरों के लिए बनेगी ड्रोन ट्रेनिंग लैब अक्टूबर से शुरू होगा प्रशिक्षण
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चेन्नई : भारतीय डिफेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनी ‘ज़ुप्पा जियो नेविगेशन टेक्नोलॉजीज़’ ने तमिलनाडु अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स कॉर्पोरेशन (TNUAVC) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य सेना के रेजिमेंटल सेंटर्स में स्वदेशी ड्रोन ट्रेनिंग लैब स्थापित करना और अग्निवीरों, मौजूदा रक्षा कर्मियों तथा सेना से रिटायर हो रहे जवानों के लिए व्यवस्थित UAV पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करना है।
इस पहल की शुरुआत तमिलनाडु के वेलिंगटन, कूनूर स्थित मद्रास रेजिमेंटल सेंटर से की जाएगी। कार्यक्रम के पहले चरण में शुरुआती बैच में करीब 200 कर्मियों को प्रशिक्षण देने की योजना है, जबकि सालाना लगभग 1,000 कर्मियों को इस कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण अक्टूबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
यह कार्यक्रम चार हफ्तों का होगा और इसमें ड्रोन संचालन से जुड़े तकनीकी, व्यावहारिक और सुरक्षा आधारित कई मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे। प्रतिभागियों को मिशन UAV फ्लाइट सिम्युलेटर के जरिए वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे बिना जोखिम के अलग-अलग मिशन परिस्थितियों को समझ सकेंगे और ड्रोन संचालन की बुनियादी तथा उन्नत तकनीकों से परिचित हो सकेंगे।
ट्रेनिंग में रोटरक्राफ्ट ऑपरेशन और एयरोडायनामिक्स को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस मॉड्यूल के जरिए प्रतिभागियों को ड्रोन के उड़ान सिद्धांत, संतुलन, दिशा नियंत्रण और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके व्यवहार के बारे में समझाया जाएगा।
इसके अलावा हाइब्रिड ऑपरेशन से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आधुनिक सैन्य और नागरिक UAV सिस्टम में अलग-अलग प्रकार की तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशिक्षुओं को उन प्रणालियों की कार्यप्रणाली और उपयोग से परिचित कराया जाएगा, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक उड़ान तकनीकों का संयोजन होता है।
चार सप्ताह के इस कार्यक्रम में ड्रोन इक्विपमेंट मेंटेनेंस भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। प्रशिक्षण लेने वाले कर्मियों को ड्रोन के विभिन्न हिस्सों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, मोटर, बैटरी, सेंसर और अन्य उपकरणों की देखरेख के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पायलट तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे कर्मियों को प्रशिक्षित करना भी है जो UAV सिस्टम की तकनीकी समस्याओं को समझ सकें और बेसिक स्तर पर उनकी देखभाल कर सकें।
रिस्क असेसमेंट और सेफ्टी मैनेजमेंट को भी ट्रेनिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। ड्रोन ऑपरेशन के दौरान मौसम, उड़ान क्षेत्र, तकनीकी खराबी और आसपास की गतिविधियों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसलिए प्रशिक्षुओं को मिशन शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन करने और सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन पूरा करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
प्रोग्राम में बेसिक असेंबली का मॉड्यूल भी शामिल रहेगा। इसमें प्रतिभागियों को ड्रोन के विभिन्न हिस्सों को पहचानने, उन्हें जोड़ने और सामान्य तकनीकी सेटअप की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इससे प्रशिक्षुओं को केवल उड़ान संचालन ही नहीं, बल्कि UAV की संरचना और उसके तकनीकी पक्ष की भी जानकारी मिलेगी।
प्रैक्टिकल UAV फ्लाइंग को कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वास्तविक ड्रोन उड़ाने का अनुभव दिया जाएगा। इसमें टेकऑफ, लैंडिंग, दिशा नियंत्रण, निर्धारित ऊंचाई पर उड़ान और अलग-अलग मिशन परिस्थितियों में संचालन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
मिशन प्लानिंग के जरिए कर्मियों को यह सिखाया जाएगा कि किसी भी ड्रोन ऑपरेशन से पहले उड़ान मार्ग, क्षेत्र, लक्ष्य और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की योजना किस तरह बनाई जाती है। रक्षा क्षेत्र में UAV का इस्तेमाल निगरानी, मैपिंग और अन्य विशेष अभियानों में किया जाता है। ऐसे में बेहतर मिशन प्लानिंग को सुरक्षित और सफल संचालन के लिए जरूरी माना जाता है।
ट्रेनिंग प्रोग्राम में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA के नियमों से जुड़े मॉड्यूल भी शामिल होंगे। प्रतिभागियों को भारत में ड्रोन संचालन के लिए लागू नियमों, प्रतिबंधों और जरूरी अनुमतियों की जानकारी दी जाएगी। इससे वे सैन्य सेवा के साथ-साथ भविष्य में नागरिक ड्रोन क्षेत्र में भी अपने कौशल का उपयोग कर सकेंगे।
इस समझौते की खास बात यह है कि इसमें अग्निवीरों के साथ वर्तमान रक्षा कर्मियों और सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों को भी शामिल करने की योजना है। इससे प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को सेवा के दौरान और सेवा के बाद दोनों स्थितियों में ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े अवसरों का लाभ मिल सकता है।
भारत में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम हो रहा है। निगरानी, सीमा सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और अन्य सैन्य जरूरतों में UAV की भूमिका बढ़ती जा रही है। ऐसे में प्रशिक्षित ड्रोन पायलट और तकनीकी कर्मियों की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
मद्रास रेजिमेंटल सेंटर से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम आगे चलकर अन्य रेजिमेंटल सेंटर्स तक विस्तारित किया जा सकता है। शुरुआती चरण में 200 कर्मियों की ट्रेनिंग और सालाना करीब 1,000 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य इस पहल को बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर Züppa Geo Navigation Technologies और TNUAVC के बीच हुआ यह समझौता रक्षा कर्मियों को आधुनिक UAV तकनीक में प्रशिक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले चार सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए अग्निवीरों और अन्य सैन्य कर्मियों को ड्रोन संचालन, मेंटेनेंस, सुरक्षा और मिशन प्लानिंग से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
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