तमिलनाडू
SIR विवाद पर डीएमके का बड़ा हमला ए. राजा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल
Ratna Netam
17 Oct 2026 2:25 PM IST

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चेन्नई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज कर दी है। डीएमके संसदीय दल की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने शनिवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया का विरोध करने के अपनी पार्टी के रुख का बचाव किया। साथ ही कांग्रेस की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि उसे डीएमके के राजनीतिक फैसलों पर सवाल करने का नैतिक अधिकार कैसे है।
शुरुआत से SIR का विरोध कर रही डीएमके
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ए. राजा ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही डीएमके इसका लगातार विरोध करती आ रही है। पार्टी ने केवल संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद के बाहर भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।राजा ने दावा किया कि डीएमके देश की उन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में सबसे आगे रही है, जिन्होंने इस प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं और आशंकाओं को लगातार उजागर किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का विरोध किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर मांगा था समर्थन
ए. राजा ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने SIR के मुद्दे पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के खिलाफ व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए डीएमके ने कई महत्वपूर्ण पहल की थीं।राजा के मुताबिक, कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री इस विषय पर चर्चा करने और विरोध में प्रस्ताव पारित करने के उद्देश्य से चेन्नई भी आए थे। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी इस मुद्दे पर लंबे समय से सक्रिय रही है।उन्होंने कहा कि डीएमके ने लगातार विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया है।
कांग्रेस के नैतिक अधिकार पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ए. राजा ने कांग्रेस के रवैये पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि SIR के खिलाफ लगातार आंदोलन और राजनीतिक प्रयास करने वाली डीएमके की आलोचना करने का कांग्रेस के पास क्या नैतिक आधार है।उनकी टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक मतभेद उभर रहे हैं। डीएमके और कांग्रेस दोनों इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन विरोध के तौर-तरीकों को लेकर उनके बीच असहमति दिखाई दे रही है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव पारित
इससे पहले डीएमके संसदीय दल की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया गया। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए।डीएमके ने SIR प्रक्रिया वापस लेने की मांग भी की है। इसके साथ ही पार्टी ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।
मतदाताओं के अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता
SIR को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा बना हुआ है। विपक्ष का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाए रखने के लिए पुनरीक्षण आवश्यक है, ताकि मृत, दोहराए गए और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।
राष्ट्रीय राजनीति में तेज हो सकती है बहस
ए. राजा के बयान के बाद SIR विवाद के साथ-साथ विपक्षी एकजुटता को लेकर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ डीएमके मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर अड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के साथ उसके मतभेद राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहे हैं।राजनीतिक दृष्टि से यह विवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर विपक्षी दलों की रणनीति और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
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