तमिलनाडू

DMK ने कांग्रेस से दूरी बनाई, BJP-कांग्रेस के खिलाफ तीसरे गठबंधन की तैयारी

Kavita2
9 Jun 2026 12:57 PM IST
DMK ने कांग्रेस से दूरी बनाई, BJP-कांग्रेस के खिलाफ तीसरे गठबंधन की तैयारी
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Tamil Nadu तमिलनाडु: सीएम और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने नेशनल लेवल पर तीसरे विकल्प के रूप में गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस अलायंस का मकसद दोनों प्रमुख नेशनल पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के विकल्प के रूप में उभरना है।

सूत्रों के मुताबिक, एमके स्टालिन और DMK पहले ही कई रीजनल पार्टियों के साथ बातचीत कर रहे हैं, जो वर्तमान में भाजपा और कांग्रेस दोनों से संतुष्ट नहीं हैं। यह प्लान इस साल के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले तैयार किया गया था। हालांकि, फिलहाल कोई आधिकारिक कदम या गठबंधन का ऐलान नहीं हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि DMK का यह कदम देश की राजनीतिक दिशा में नया मोड़ ला सकता है। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में रीजनल पार्टियां अपने क्षेत्रीय हितों को लेकर नेशनल पार्टियों के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं। ऐसे में तीसरे विकल्प के रूप में गठबंधन बनने से न सिर्फ चुनावी ताकत बढ़ेगी, बल्कि कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट बंटने का असर भी पड़ेगा।

बताया गया है कि DMK की ओर से बातचीत में उन रीजनल पार्टियों को शामिल किया जा रहा है, जिनका मुख्य फोकस अपने राज्य के विकास और क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित है। इस अलायंस का मकसद केवल सत्ता पाने का नहीं, बल्कि नीति निर्माण और नेशनल पॉलिसी पर भी प्रभाव डालना है।

राजनीतिक सूत्रों ने यह भी कहा कि इस गठबंधन के तहत सभी पार्टियों के लिए समान रूप से प्रतिनिधित्व की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, चुनावी रणनीति और सीट साझा करने के मसले पर फिलहाल गोपनीयता बरती जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर तीसरा अलायंस बनता है, तो यह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। विशेषकर दक्षिण भारत में इस गठबंधन की भूमिका निर्णायक हो सकती है, क्योंकि DMK पहले ही अपने प्रभावशाली वोट बैंक और मजबूत संगठनात्मक ढांचे के लिए जानी जाती है।

हालांकि, DMK ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पार्टी के नेताओं ने सिर्फ इतना कहा है कि वे विभिन्न रीजनल पार्टियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और चुनावी रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरा विकल्प बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें विभिन्न राज्यों की पार्टियों की मांगों और प्राथमिकताओं को संतुलित करना होगा। इसके बावजूद, DMK का यह प्रयास यह दिखाता है कि पार्टी नेशनल स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश में है।

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