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Coimbatore कोयंबटूर: योग केंद्र के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने एक बार फिर अपनी अद्भुत मानसिक और शारीरिक क्षमता का परिचय दिया। दो अहम ब्रेन सर्जरी के बावजूद डॉक्टरों की सलाह को चुनौती देते हुए, उन्होंने 17 दिनों की कठिन मोटरसाइकिल यात्रा कर कैलाश पर्वत की ऊंचाई 18,000 फीट तक पहुँचने का साहसिक कार्य किया। शनिवार को कोयंबटूर एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। मीडिया से बातचीत में सद्गुरु ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें बाइक चलाने से मना किया था, लेकिन योग की शक्ति के बल पर उन्होंने यह असंभव कार्य पूरा किया। उन्होंने बताया कि यह यात्रा केवल आध्यात्मिक नहीं थी, बल्कि मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और योग के अभ्यास की ताकत का प्रमाण भी है। सद्गुरु ने कहा, "मैंने वह कर दिखाया, जिसे डॉक्टर असंभव मानते थे। योग अभ्यास व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाता है।" उनका यह साहसिक सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है, खासकर उनके लिए जो गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल उनके लिए नहीं थी, बल्कि योग की सच्ची शक्ति को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का प्रयास थी। इसके अलावा सद्गुरु ने वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और टैक्स सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा, "हालांकि अमेरिका के टैक्स सिस्टम का असर है, लेकिन देश के विकास के लिए जरूरी कदम उठाना ही चाहिए। हमें यह साबित करना होगा कि हम एक शक्तिशाली राष्ट्र हैं।"तमिलनाडु की राजनीति पर चर्चा करते हुए, उन्होंने दक्षिण के सुपरस्टार थलापति विजय का उल्लेख किया। सद्गुरु ने कहा, "तमिलनाडु में राजनीति और सिनेमा का गहरा संबंध है। जिस तरह पहले एमजीआर और जयललिता ने राजनीति में कदम रखा, उसी तरह अब विजय भी राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं।" सद्गुरु की सामाजिक पहल भी उल्लेखनीय है। मार्च 2022 में उन्होंने 'मिट्टी बचाओ अभियान' की शुरुआत की थी। इस अभियान ने केवल 100 दिनों में 3.91 अरब से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई, जो पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सद्गुरु की इस यात्रा ने योग और मानसिक शक्ति के महत्व को नए आयाम पर पहुंचाया है। उनका संदेश साफ है कि चाहे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियाँ हों या भौतिक कठिनाइयाँ, योग और आत्मविश्वास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उनके अनुयायी और आम जनता इस प्रेरक यात्रा से प्रोत्साहित होकर अपने जीवन में मानसिक और शारीरिक दृढ़ता को अपनाने की दिशा में प्रेरित हो रहे हैं। सद्गुरु जग्गी वासुदेव की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तित्व की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि योग के व्यापक सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव को भी उजागर करती है। उनका अनुभव यह सिखाता है कि सही मानसिक तैयारी, योग अभ्यास और आत्मविश्वास किसी भी चुनौती को पार करने में मदद कर सकते हैं।
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