
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन और हालिया सरकार गठन को लेकर चर्चाओं के बीच Thol. Thirumavalavan ने स्पष्ट किया है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ गठबंधन के दौरान किसी प्रकार की नाराज़गी की स्थिति नहीं रही। उन्होंने यह बयान दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया, जहां उनसे राज्य की नई राजनीतिक स्थिति और गठबंधन राजनीति को लेकर सवाल पूछे गए थे।
Viduthalai Chiruthaigal Katchi के नेता थोल. थिरुमावलवन ने कहा कि पार्टी का रुख हमेशा सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि DMK के साथ गठबंधन एक राजनीतिक समझ के तहत हुआ था और इसमें किसी तरह की असंतोष या मतभेद की बात नहीं है। उनके अनुसार, गठबंधन का उद्देश्य राज्य में समान विचारधारा वाली ताकतों को साथ लाकर सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना था।
इस दौरान पत्रकारों ने उनसे राज्य में नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर भी सवाल किए। इस पर उन्होंने Vijay को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि जो भी नेता जनता के समर्थन से सत्ता में आता है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान सभी दलों को करना चाहिए।
थिरुमावलवन ने यह भी कहा कि नई सरकार से जनता को कई उम्मीदें हैं, खासकर विकास, सामाजिक न्याय और रोजगार के क्षेत्रों में। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करेगी और राज्य के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम करेगी।
DMK के साथ संबंधों को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने दोहराया कि राजनीतिक गठबंधन परिस्थितियों और जनहित को देखते हुए बनते हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन में रहते हुए विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपसी संबंधों में तनाव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी का फोकस सामाजिक मुद्दों और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थिरुमावलवन का यह बयान राज्य की गठबंधन राजनीति में स्थिरता का संकेत देता है। तमिलनाडु में लंबे समय से DMK और उसके सहयोगी दलों के बीच चुनावी और राजनीतिक सहयोग देखा जाता रहा है, जिसमें समय-समय पर मतभेद की खबरें भी आती रही हैं, लेकिन वे अक्सर संवाद के माध्यम से सुलझा लिए जाते हैं।
नई सरकार के गठन के बाद यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे गठबंधन की एकता को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग सकता है। साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि सहयोगी दल आने वाले समय में सरकार के साथ मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।





