
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में कोयंबटूर की पेरियार अरिवुलगम लाइब्रेरी के लिए किताबों की खरीद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने इस खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी की लीगल विंग के संयुक्त सचिव आई. परांथमैन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को पत्र लिखकर मामले की विस्तृत जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लाइब्रेरी के लिए ऐसी किताबें खरीदी गईं, जिन्हें कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया था और फर्जी लेखकों के नाम से प्रकाशित कराया गया था।
शिकायत के मुताबिक, किताबों की खरीद में कई तरह की अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कुछ अज्ञात प्रकाशन संस्थानों को बड़ी संख्या में किताबों के ऑर्डर दिए गए। इन प्रकाशकों की कार्यप्रणाली और उनकी विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि किताबों के लेखकों और प्रकाशकों से संबंधित जानकारी की उचित जांच नहीं की गई।
फर्जी लेखकों और ISBN को लेकर गंभीर आरोप
DMK की शिकायत में ISBN नंबर जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि प्रकाशकों को प्रत्येक किताब के लिए अलग-अलग ISBN लेना चाहिए था, लेकिन कुछ प्रकाशकों ने एक साथ बड़ी संख्या में ISBN हासिल किए। इस आधार पर किताबों के प्रकाशन और उनकी वास्तविकता की जांच की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ कथित फर्जी लेखकों ने बेहद कम समय में 162 तक किताबें लिख डालीं। इसे लेकर लेखकों की वास्तविक पहचान, पुस्तकों की मौलिकता और उनकी सामग्री की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए गए हैं।
इसके अलावा किताबों की कीमतों को वास्तविक मूल्य से काफी अधिक रखने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकार ने पुस्तकों की गुणवत्ता, लेखकों की पहचान और प्रकाशकों की विश्वसनीयता की पर्याप्त जांच किए बिना भुगतान कर दिया। DMK ने पूरे खरीद मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित करने की मांग की है।
पलानीस्वामी ने रिटायर्ड जज से जांच कराने की मांग की
इस विवाद में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
शनिवार को जारी बयान में पलानीस्वामी ने सवाल किया कि TVK सरकार लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई पुस्तकों की जांच-पड़ताल करने में कैसे नाकाम रही। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी थी।
पलानीस्वामी ने स्पष्ट किया कि इस कथित घोटाले के लिए जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपों के दायरे में TVK के नेता हों या DMK से जुड़े लोग, किसी को भी जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
जांच और जवाबदेही की मांग तेज
पेरियार अरिवुलगम लाइब्रेरी की किताबों की खरीद को लेकर उठे सवालों ने तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। DMK ने DVAC से शिकायत कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जबकि AIADMK ने स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग उठाई है।
फिलहाल ये सभी आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र जांच तथा आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किताबों की खरीद में वास्तव में अनियमितताएं हुईं या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।





