
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों ने मांग की है कि अनाइमंगलम चोरा-युग की ऐतिहासिक कॉपर प्लेट्स को राज्य में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाया जाए। ये कॉपर प्लेट्स चोल साम्राज्य के राजेंद्र चोल प्रथम के समय की मानी जाती हैं और ऐतिहासिक रूप से उनके पिता राजा राजा चोल प्रथम द्वारा जारी एक शाही आदेश से संबंधित हैं। इस मुद्दे ने राज्य में ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में नीदरलैंड की लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी ने 16 मई को 11वीं सदी की इन चोल कॉपर प्लेट्स को वापस किया। इन प्लेट्स में तमिल और संस्कृत भाषा में शिलालेख मौजूद हैं, जो उस समय के प्रशासनिक और धार्मिक इतिहास को दर्शाते हैं। यह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का एक सेट है, जिसे 11वीं सदी ईस्वी के दौरान चोल राजाओं द्वारा जारी रॉयल चार्टर के रूप में जाना जाता है।
इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में नागपट्टिनम क्षेत्र में स्थित चूलमणिवर्मा-विहार नामक बौद्ध विहार को अनाइमंगलम गांव दान किए जाने का विवरण दर्ज है। यह दान तत्कालीन चोल शासकों द्वारा धार्मिक संस्थानों को दिए गए संरक्षण और सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन कॉपर प्लेट्स को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा मिली, जब इन्हें नीदरलैंड से वापस लाया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हेग यात्रा के दौरान भेंट किया गया। इसके बाद तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को राज्य में लाकर जनता के लिए प्रदर्शित करने की मांग उठाई है।
राजनीतिक दलों का कहना है कि यह केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि तमिल सभ्यता, चोल साम्राज्य की प्रशासनिक प्रणाली और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उनका मानना है कि इन प्लेट्स को राज्य में सुरक्षित रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि आम जनता, शोधकर्ता और छात्र इस ऐतिहासिक धरोहर को करीब से समझ सकें।
वहीं, इतिहासकारों का मानना है कि इस तरह के प्राचीन दस्तावेजों का संरक्षण और अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये न केवल शासकीय व्यवस्था बल्कि उस समय की भाषा, संस्कृति और धार्मिक सह-अस्तित्व को भी दर्शाते हैं। चोल काल को दक्षिण भारत के सबसे समृद्ध और संगठित शासकीय युगों में से एक माना जाता है।
इन कॉपर प्लेट्स के वापस आने से तमिलनाडु में सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक पहचान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों का कहना है कि इन्हें किसी संग्रहालय या सार्वजनिक प्रदर्शनी स्थल पर रखा जाना चाहिए, जहां लोग इन्हें देख सकें और उनके ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें।
कुल मिलाकर, अनाइमंगलम चोल-युग कॉपर प्लेट्स का मुद्दा अब केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तमिलनाडु में सांस्कृतिक विरासत, पहचान और संरक्षण की नीति पर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है।





