
Tamil Nadu तमिलनाडु: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने तमिलनाडु सरकार से अपील की है कि सलेम में सामने आए महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या अपराध जांच विभाग (CID) को सौंपी जाए। उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि इसमें कई पीड़ित महिलाएं शामिल हैं और मामले की गहराई से जांच आवश्यक है।
यह मामला Salem, Tamil Nadu, India से जुड़ा है, जहां आरोप है कि मणिकंदन नाम के एक व्यक्ति ने गरीब महिलाओं को लोन देने का झांसा देकर उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेला। इसके बाद कथित रूप से उनके अश्लील वीडियो बनाए गए और उन्हीं वीडियो के आधार पर 50 से अधिक महिलाओं को ब्लैकमेल किया गया। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल है।
एम. वीरपांडियन ने अपने बयान में कहा कि यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है और इसमें पीड़ित महिलाओं के साथ गंभीर अपराध किया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी मणिकंदन को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल एक गिरफ्तारी से मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ सकती, इसलिए निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस मामले की जांच CBI या CID को सौंपी जाए, ताकि सभी दोषियों की पहचान हो सके और उन्हें कड़ी सजा दिलाई जा सके, चाहे वे किसी भी स्तर के हों।
वीरपांडियन ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका नाम ‘सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फोर्स’ रखा गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस टास्क फोर्स के काम के दायरे को और बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ सख्त निगरानी प्रणाली भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसी स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करे, तो पीड़ितों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजनीतिक स्तर पर भी इसकी जांच को लेकर दबाव बढ़ रहा है।





