तमिलनाडू

CWMA बैठक टालने की मांग, पार्टियों ने उठाया प्रतिनिधित्व का मुद्दा

Harrison
27 April 2026 8:43 PM IST
CWMA बैठक टालने की मांग, पार्टियों ने उठाया प्रतिनिधित्व का मुद्दा
x
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में कावेरी जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधि तेज हो गई है। वाम दलों और क्षेत्रीय पार्टी ने 29 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रस्तावित कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) की 50वीं बैठक को टालने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनी हुई सरकारों के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में इस तरह की अहम बैठक आयोजित करना उचित नहीं होगा।
इस संबंध में Communist Party of India (Marxist), Communist Party of India और Pattali Makkal Katchi ने सोमवार को संयुक्त रूप से बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि अधिकारियों के स्तर पर अकेले इस मुद्दे पर चर्चा करना राज्यों के हितों के साथ न्याय नहीं करेगा।
CPM के राज्य सचिव पी शानमुगम, CPI के राज्य सचिव एम वीरपंडी और PMK नेता अंबुमणि रामदास ने केंद्र सरकार से अपील की कि बैठक को तब तक स्थगित किया जाए जब तक संबंधित राज्यों में नई सरकारें पूरी तरह स्थापित नहीं हो जातीं।
नेताओं ने कहा कि हाल ही में तमिलनाडु और केरल में चुनाव हुए हैं और 4 मई को परिणाम आने वाले हैं। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में, नई सरकारों के गठन से पहले इस तरह की बैठक करना उचित नहीं माना जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी जल बंटवारा एक संवेदनशील और लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है, जिसमें राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संतुलन आवश्यक है। चुनी हुई सरकारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से ही इस तरह के निर्णयों में पारदर्शिता और स्वीकार्यता सुनिश्चित हो सकती है।
नेताओं के अनुसार, यदि बैठक तय समय पर होती है और उसमें केवल अधिकारी ही शामिल होते हैं, तो इससे राज्यों के हितों का सही प्रतिनिधित्व नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि निर्वाचित प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनें।
केंद्र सरकार से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए बैठक को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए, ताकि नई सरकारें अपने प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर सकें।
कावेरी जल विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चला आ रहा है, जिसमें समय-समय पर विभिन्न मंचों पर चर्चा होती रही है। CWMA की बैठकें इस विवाद के समाधान और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि बैठक अपने निर्धारित समय पर होती है या इसे स्थगित किया जाता है।
यह मुद्दा एक बार फिर जल प्रबंधन और राज्यों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
Next Story