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Tamil Nadu तमिलनाडु। मदुरै के प्रसिद्ध तिरुपरंकुंद्रम सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में आज हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां उन्होंने भगवान मुरुगन द्वारा असुर सूरपद्मन के संहार की लीला — ‘सूरसम्हारम’ — का साक्षात्कार किया। यह अद्भुत दृश्य कंद शष्ठि महोत्सव का मुख्य आकर्षण होता है, जो तमिलनाडु के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है।
सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास की गलियों में भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने भगवान मुरुगन की जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक के बाद पारंपरिक संगीत और नृत्य के साथ सूरसम्हारम लीला का मंचन हुआ, जिसमें भगवान मुरुगन के असुर पर विजय की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। इस धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए। पुलिस और स्वयंसेवकों की टीम ने भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन पंक्तियाँ, जल और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई थी।
कंद शष्ठि उत्सव की यह घटना अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान मुरुगन ने इसी दिन असुर सूरपद्मन का वध कर देवताओं को उनके अत्याचार से मुक्त कराया था। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर उपवास और पूजा-अर्चना की, वहीं कई भक्तों ने कावड़ी सेवा के रूप में भगवान मुरुगन को समर्पित भक्ति प्रदर्शित की। मंदिर पुजारियों ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक रही, और पूरा आयोजन बेहद शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
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