तमिलनाडू

बकरी बाजार में उमड़ी भीड़, करोड़ों का व्यापार

Ratna Netam
6 Nov 2026 2:35 PM IST
बकरी बाजार में उमड़ी भीड़, करोड़ों का व्यापार
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तमिलनाडु। दिवाली के त्योहार से पहले तमिलनाडु के पशु बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। बकरियों और अन्य पशुओं की खरीदारी के लिए किसान, पशुपालक, मांस कारोबारी और आम खरीदार बड़ी संख्या में बाजारों का रुख कर रहे हैं। राज्य के रानीपेट जिले का प्रसिद्ध साप्ताहिक बकरी बाजार भी त्योहारों के दौरान बड़े कारोबार के लिए जाना जाता है। रानीपेट में दिवाली के अवसर पर तीन करोड़ रुपये की बकरियों की बिक्री की खबर पहले भी सामने आ चुकी है। हालांकि, 6 नवंबर 2026 को रानीपेट में तीन करोड़ रुपये की बिक्री होने की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। इस बीच राज्य के दूसरे जिलों में दिवाली से पहले करोड़ों रुपये का पशु कारोबार दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं।रानीपेट का साप्ताहिक बाजार तमिलनाडु के प्रमुख पशु व्यापार केंद्रों में शामिल है। यहां प्रत्येक शुक्रवार को बाजार लगता है, जिसमें सब्जियों, फलों, अनाज और घरेलू जरूरत की वस्तुओं के अलावा बकरियों, मुर्गियों तथा अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री होती है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक अपने पशुओं को लेकर बाजार पहुंचते हैं।इस बाजार की खासियत यह है कि यहां केवल स्थानीय व्यापारी ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी खरीदार पहुंचते हैं। त्योहारों के दौरान बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
दिवाली से पहले बढ़ी बकरियों की मांग
दिवाली के अवसर पर तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में मांस की मांग बढ़ने से बकरियों की खरीदारी तेज हो जाती है। इस मांग को पूरा करने के लिए मांस कारोबारी और थोक व्यापारी त्योहार से पहले ही पशुओं की खरीद शुरू कर देते हैं।ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है। सालभर पशुओं की देखभाल और पालन-पोषण करने वाले किसानों को त्योहारों के दौरान अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद रहती है।पशुओं की कीमत उनके वजन, उम्र, नस्ल और शारीरिक स्थिति के आधार पर तय होती है। बाजार में खरीदार पशुओं का निरीक्षण करने के बाद विक्रेताओं से मोलभाव करते हैं। बड़े व्यापारी एक साथ कई पशुओं की खरीद करते हैं, जबकि छोटे कारोबारी अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी करते हैं।
पहले भी तीन करोड़ रुपये का कारोबार
रानीपेट बाजार में बड़े पैमाने पर बकरियों की बिक्री का इतिहास रहा है। स्थानीय तमिल समाचार पत्र डेली थांथी की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली से पहले यहां लगभग तीन करोड़ रुपये का बकरी कारोबार हुआ था।उस दौरान बाजार में सुबह करीब साढ़े चार बजे से ही खरीदारी शुरू हो गई थी। विभिन्न जिलों से पशुपालक बकरियां लेकर पहुंचे थे। बाजार में सफेद, काली, लाल और स्थानीय नस्लों की बकरियां बिक्री के लिए उपलब्ध थीं।रिपोर्ट के अनुसार, उस समय बकरियों की कीमत लगभग पांच हजार रुपये से लेकर बीस हजार रुपये तक थी। सुबह से दोपहर तक बड़ी संख्या में खरीद-बिक्री हुई थी। हालांकि, यह विवरण वर्ष 2022 की रिपोर्ट का है, इसे वर्तमान वर्ष की बिक्री नहीं माना जाना चाहिए।
दूसरे जिलों में भी करोड़ों की बिक्री
तमिलनाडु में इस वर्ष दिवाली से पहले कई पशु बाजारों में अच्छा कारोबार हुआ है। तिरुनेलवेली के मेलापालयम बकरी बाजार में तीन नवंबर को लगभग चार करोड़ रुपये के कारोबार की खबर सामने आई थी।इस बाजार में विभिन्न जिलों के व्यापारियों ने बड़ी संख्या में बकरियों की खरीदारी की। कुछ विशेष नस्लों की बकरियां ऊंची कीमत पर बिकीं। व्यापारियों के अनुसार, त्योहार के कारण खरीदारी में तेजी देखी गई।इसी तरह कल्लाकुरिची जिले के उलुंदूरपेट बाजार में भी दिवाली से पहले लगभग चार करोड़ रुपये की बकरियों की बिक्री होने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि त्योहारों के दौरान तमिलनाडु के पशु बाजारों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां होती हैं।
किसानों और पशुपालकों के लिए कमाई का अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। छोटे और सीमांत किसान खेती के साथ बकरी पालन करके अतिरिक्त आय प्राप्त करते हैं। बकरियों की बिक्री से मिलने वाली रकम का उपयोग परिवार की जरूरतें पूरी करने, कृषि कार्यों और नए पशुओं की खरीद में किया जा सकता है।त्योहारों से पहले मांग बढ़ने पर पशुपालकों को सामान्य दिनों की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, पशुओं के चारे, परिवहन और देखभाल पर होने वाला खर्च भी उनकी वास्तविक कमाई को प्रभावित करता है।बड़े पशु बाजारों से केवल किसानों को ही फायदा नहीं होता, बल्कि परिवहन व्यवसाय, पशु चारा विक्रेताओं और छोटे कारोबारियों को भी रोजगार मिलता है। बकरियों को बाजार तक पहुंचाने और खरीद के बाद दूसरे स्थानों पर ले जाने के लिए छोटे मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।
पशुओं की गुणवत्ता और वजन के आधार पर कीमत
बकरी बाजार में कीमत निर्धारित करने के लिए कई बातों को ध्यान में रखा जाता है। स्वस्थ, अधिक वजन और अच्छी नस्ल के पशुओं को सामान्यतः बेहतर कीमत मिलती है।व्यापारी यह भी देखते हैं कि बकरी की उम्र कितनी है और उसकी शारीरिक स्थिति कैसी है। मांस कारोबार से जुड़े खरीदार विशेष रूप से वजन और संभावित मांस की मात्रा पर ध्यान देते हैं।त्योहारों के समय मांग बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में पशुओं की उपलब्धता और स्थानीय मांग के कारण कीमतें समान नहीं रहतीं।
दिवाली से पहले बाजारों में उत्साह
आठ नवंबर को दिवाली मनाए जाने से पहले तमिलनाडु में खरीदारी का माहौल बना हुआ है। कपड़ों, मिठाइयों, पटाखों और घरेलू सामान के साथ कई इलाकों में पशु बाजारों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं।रानीपेट जैसे पारंपरिक बाजार ग्रामीण उत्पादकों और शहरी खरीदारों के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक कड़ी हैं। त्योहारों के दौरान यहां होने वाला कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था में पशुपालन के योगदान को दर्शाता है।फिलहाल रानीपेट के इस वर्ष के दिवाली बाजार की अंतिम बिक्री का प्रमाणित आंकड़ा सामने आने का इंतजार है। वहीं राज्य के अन्य पशु बाजारों में करोड़ों रुपये के कारोबार की रिपोर्ट से व्यापारियों और पशुपालकों में उत्साह है।
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