
तमिलनाडु : राजधानी मद्रास (अब चेन्नई) में 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में अपराध की दुनिया का एक ऐसा नाम सामने आया, जिसने पूरे दक्षिण भारत को झकझोर कर रख दिया। गौरी शंकर, जिसे लोग 'ऑटो शंकर' के नाम से जानते थे, शुरुआत में एक साधारण ऑटो-रिक्शा चालक था। लेकिन कुछ ही वर्षों में वह अवैध शराब, देह व्यापार और संगठित अपराध का बड़ा चेहरा बन गया। उसके अपराधों का खुलासा होने के बाद सामने आईं घटनाओं ने पुलिस और आम लोगों को हैरान कर दिया था।
बताया जाता है कि गौरी शंकर मूल रूप से तमिलनाडु के वेल्लोर क्षेत्र का रहने वाला था। बेहतर रोजगार की तलाश में वह मद्रास आया और जीविका चलाने के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने लगा। हालांकि, ऑटो चलाना उसके लिए केवल रोजी-रोटी कमाने का साधन नहीं था। शहर के अलग-अलग इलाकों में आने-जाने के दौरान उसने अपराध की दुनिया, स्थानीय नेटवर्क और अवैध गतिविधियों को करीब से समझना शुरू किया। इसी दौरान उसने यह भी जान लिया कि किन इलाकों में अवैध शराब की मांग है, कहां देह व्यापार संचालित होता है और स्थानीय स्तर पर किन लोगों से संबंध बनाकर अपना अवैध कारोबार बढ़ाया जा सकता है।
धीरे-धीरे गौरी शंकर ने थिरुवान्मियूर और आसपास के इलाकों में अवैध देसी शराब का कारोबार शुरू किया। इसके बाद उसने देह व्यापार के नेटवर्क में भी अपनी पैठ बना ली। कुछ ही वर्षों में उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कई अवैध अड्डे खड़े कर लिए। उसके प्रभाव और आपराधिक नेटवर्क के कारण इलाके में उसका खौफ बढ़ने लगा और वह अपराध जगत का बड़ा नाम बन गया।
साल 1988 से 1989 के बीच मद्रास से कई युवतियों और महिलाओं के रहस्यमय तरीके से लापता होने की घटनाएं सामने आने लगीं। शुरुआत में इन मामलों को अलग-अलग घटनाएं माना गया, लेकिन जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में आरोप सामने आए कि ऑटो शंकर और उसके गिरोह ने महिलाओं का अपहरण कर उनकी हत्या की थी। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कई ऐसे सबूत मिले, जिन्होंने पूरे मामले का खुलासा किया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हत्या के बाद शवों को ठिकाने लगाने के लिए बेहद क्रूर तरीके अपनाए गए थे। आरोपों के अनुसार कुछ शवों को समुद्र किनारे ले जाकर जला दिया गया, जबकि कुछ शवों को भवनों की दीवारों के भीतर छिपा दिया गया था ताकि लंबे समय तक किसी को उनके बारे में पता न चल सके। इन खुलासों ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी और ऑटो शंकर का नाम देश के सबसे कुख्यात अपराधियों में शामिल हो गया।
पुलिस ने विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर गौरी शंकर तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की। मामले में कई लोगों से पूछताछ की गई और अपराधों की परतें खुलती चली गईं। यह मामला उस दौर के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना गया और लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।
ऑटो शंकर की कहानी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि किस प्रकार एक साधारण जीवन जीने वाला व्यक्ति अपराध की दुनिया में कदम रखकर संगठित अपराध का हिस्सा बन सकता है। उसका आपराधिक नेटवर्क केवल अवैध शराब और देह व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस पर कई गंभीर अपराधों के आरोप भी लगे। उसके अपराधों ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी और पुलिस को व्यापक स्तर पर अभियान चलाना पड़ा।
आज भी ऑटो शंकर का नाम भारत के चर्चित सीरियल किलरों और संगठित अपराधियों की सूची में लिया जाता है। उसके जीवन और अपराधों पर कई किताबें, डॉक्यूमेंट्री और वेब सीरीज भी बन चुकी हैं। यह मामला अपराध जगत के इतिहास में एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने यह दिखाया कि संगठित अपराध किस तरह समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।





