
तमिलनाडु : मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय यानी थलापति विजय की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह मंत्री से बैठक के बाद मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन बिल को लेकर अपने रुख में बदलाव कर लिया है। इस मामले को लेकर तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टियां डीएमके और एआईएडीएमके लगातार सरकार पर निशाना साध रही हैं।
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार के मंत्री आधव अर्जुन को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में भी अपना रुख स्पष्ट रखा था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर और तमिलनाडु के स्तर पर लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा स्थिति में बनाए रखने की बात कही थी।
दरअसल, परिसीमन का मुद्दा दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए लंबे समय से संवेदनशील रहा है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए भविष्य में होने वाले परिसीमन के दौरान उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने भी पहले कहा था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं, उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि अमित शाह से मुलाकात के बाद विजय के रुख में बदलाव आया है।
डीएमके और एआईएडीएमके नेताओं ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री का रुख पहले जैसा नहीं रहा। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य के हितों की मजबूती से पैरवी की जानी चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री विजय की पार्टी और सरकार की ओर से इन आरोपों को गलत बताया गया है। मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि विजय लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि लोकसभा सीटों का मौजूदा संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से तमिलनाडु और अन्य राज्यों के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के अधिकारों की रक्षा करना है और परिसीमन को लेकर किसी भी तरह के नुकसान को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
परिसीमन प्रक्रिया के तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं तथा संख्या का पुनर्निर्धारण किया जाता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होती है। हालांकि, दक्षिण भारत के राज्यों में यह चिंता बनी हुई है कि यदि सीटों का आधार केवल जनसंख्या को बनाया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, उनकी सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह मुद्दा काफी अहम माना जा रहा है। राज्य की पार्टियां इसे क्षेत्रीय अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देख रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री विजय का बयान और केंद्र सरकार के साथ उनकी मुलाकात राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) राज्य की राजनीति में नई ताकत के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में परिसीमन जैसे मुद्दे पर उनका रुख राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि विजय को एक तरफ केंद्र के साथ संवाद बनाए रखना है, वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु के क्षेत्रीय हितों को भी मजबूती से सामने रखना है। यही वजह है कि अमित शाह से मुलाकात के बाद उनके बयान पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
फिलहाल मंत्री आधव अर्जुन की सफाई के बाद विवाद को शांत करने की कोशिश की गई है, लेकिन परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा विषय बना रह सकता है। सभी दल अब इस मुद्दे पर अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।





