तमिलनाडू

तिरुवल्लुवर की भगवा तस्वीर पर विवाद, DMK–TVK ने जताई आपत्ति

Kavita2
31 May 2026 3:29 PM IST
तिरुवल्लुवर की भगवा तस्वीर पर विवाद, DMK–TVK ने जताई आपत्ति
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के मशहूर कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की एक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। लोक भवन में उन्हें भगवा वस्त्रों में दर्शनए जाने पर सत्ताधारी TVK और विपक्षी DMK दोनों पार्टियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 30 मई को ‘वैकासी अनुष्ठान’ के दौरान लोक भवन में भगवा वस्त्रों में तिरुवल्लुवर की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त तिरुवल्लुवर की छवि में उन्हें सफेद वस्त्रों में दर्शाया जाता है, जिसे तमिल संस्कृति और साहित्य में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया प्रतीक माना जाता है। लेकिन लोक भवन में प्रस्तुत की गई भगवा वस्त्र वाली तस्वीर को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो गई है।

DMK और TVK नेताओं ने इस प्रस्तुति को लेकर नाराजगी जताई है और इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ बताया है। उनका कहना है कि तिरुवल्लुवर जैसे सार्वभौमिक विचारक को किसी एक प्रतीकात्मक रंग या विचारधारा तक सीमित करना उनके व्यापक दर्शन और वैश्विक सोच के साथ अन्याय है।

तमिलनाडु के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. अरुणराज ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक वैश्विक स्तर के दार्शनिक को सीमित पहचान में बांधने की कोशिश उनके सार्वभौमिक दृष्टिकोण को कमतर आंकने के समान है। उनके अनुसार, तिरुवल्लुवर की शिक्षाएं किसी भी धार्मिक या राजनीतिक सीमा से परे हैं और उन्हें उसी रूप में सम्मान मिलना चाहिए।

इस विवाद ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों का मानना है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का उपयोग सावधानीपूर्वक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

दूसरी ओर, समर्थक पक्ष का कहना है कि सांस्कृतिक प्रतीकों की अलग-अलग व्याख्याएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन किसी भी बदलाव को लेकर व्यापक सहमति आवश्यक है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच तिरुवल्लुवर की छवि और उनकी विरासत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विद्वानों का मानना है कि ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

फिलहाल यह विवाद राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श का विषय बना हुआ है, और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

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