
चेन्नई। तमिलनाडु में केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित उच्चस्तरीय समिति की सेवाएं समाप्त करने के सरकारी फैसले को लेकर विरोध सामने आया है। स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु (SPCSS-TN) ने राज्य सरकार से 6 नवंबर को जारी आदेश वापस लेने और समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक काम जारी रखने की अनुमति देने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि समिति का गठन देश के संघीय ढांचे के सामने मौजूद चुनौतियों का अध्ययन करने और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट आने से पहले इसकी सेवाएं समाप्त करना उचित नहीं है।
शनिवार को जारी अपील में SPCSS-TN के महासचिव पी.बी. प्रिंस गजेंद्र बाबू ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था-F) विभाग ने 6 नवंबर को सरकारी आदेश G.O. (Ms) संख्या 704 जारी किया था। इस आदेश के माध्यम से केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्चस्तरीय समिति की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई थीं।
संगठन ने कहा कि इस समिति की जिम्मेदारियां तमिलनाडु राज्य विधि आयोग से अलग हैं। इसलिए दोनों संस्थाओं को एक-दूसरे का विकल्प मानना उचित नहीं होगा। SPCSS-TN के अनुसार, समिति का उद्देश्य विशेष रूप से संघीय व्यवस्था, केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों के बंटवारे तथा राज्यों के संवैधानिक अधिकारों से संबंधित विषयों का अध्ययन करना था।
संगठन ने यह भी कहा कि तमिलनाडु राज्य विधि आयोग की ओर से केंद्र-राज्य संबंधों पर कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में उच्चस्तरीय समिति की सेवाएं समाप्त करने के फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संगठन का तर्क है कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर अभी विस्तृत अध्ययन और सुझावों की आवश्यकता बनी हुई है।
SPCSS-TN ने विश्वविद्यालयों के नियमन, उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया, फीस निर्धारण और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र से संबंधित विधेयकों को लंबित रखने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। संगठन के अनुसार, ये विषय केंद्र और राज्यों के संवैधानिक संबंधों से सीधे जुड़े हुए हैं। इन पर स्पष्ट सुझाव तैयार करना आवश्यक है, ताकि राज्यों के अधिकारों से संबंधित विवादों का समाधान तलाशा जा सके।
अपील में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र का भी विशेष उल्लेख किया गया। संगठन ने कहा कि स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित पात्रता मानदंड राज्यों की भूमिका और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे मामलों में राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियों और अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है।
SPCSS-TN ने केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयों में बढ़ते हस्तक्षेप का आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि इससे संघीय व्यवस्था के मूल सिद्धांत प्रभावित हो सकते हैं। उसने आशंका जताई कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य सरकारों की भूमिका केवल केंद्रीय योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने वाली एजेंसियों तक सीमित होती जा रही है।
संगठन ने तमिलनाडु में स्वास्थ्य और शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उसके अनुसार, राज्य की इन पहलों ने सामाजिक विकास और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संगठन का मानना है कि राज्यों को अपनी आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार नीतियां बनाने का पर्याप्त अधिकार मिलना चाहिए।
SPCSS-TN ने उच्चस्तरीय समिति की भाग-1 रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि प्रमुख कानून विशेषज्ञों और समाचार पत्रों ने भी इसकी सराहना की है। संगठन के अनुसार, यह रिपोर्ट भारत जैसे विविधताओं वाले देश में संघीय शासन व्यवस्था के महत्व को समझने में उपयोगी है।
महासचिव पी.बी. प्रिंस गजेंद्र बाबू ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह 6 नवंबर को जारी आदेश वापस ले और समिति को अपना शेष कार्य पूरा करने का अवसर प्रदान करे। संगठन ने स्पष्ट किया कि अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत होने तक समिति का काम जारी रहना चाहिए, ताकि केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर विस्तृत सुझाव सामने आ सकें।





