
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में कमर्शियल उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले कुकिंग गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी की गई है। सोमवार, 1 जून से लागू नई दरों के अनुसार 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 46 रुपये की वृद्धि की गई है। इस बदलाव के बाद चेन्नई में यह सिलेंडर अब 3,283 रुपये में बेचा जाएगा। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से रेस्टोरेंट, होटल, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर पर लागू होगी, जहां रोजाना बड़े पैमाने पर एलपीजी की खपत होती है।
यह मूल्य संशोधन केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा किया गया है, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये कंपनियां हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों के उतार-चढ़ाव, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों और अन्य आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की दरों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत हर महीने कीमतों में संशोधन किया जाता है।
1 जून को लागू हुई नई दरों के तहत कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतों में बदलाव के कारण यह संशोधन जरूरी होता है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में यह बदलाव देश के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है, लेकिन चेन्नई में इसकी नई दर 3,283 रुपये तय की गई है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि इन संस्थानों की संचालन लागत में गैस एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकती है। हालांकि तेल कंपनियों का कहना है कि यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार ही कीमतों में बदलाव किया जाता है।
गौरतलब है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हर महीने समीक्षा की जाती है, जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें अलग श्रेणी में आती हैं। घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की दरों में अंतर बना रहता है ताकि विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए अलग-अलग नीति लागू की जा सके।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद चेन्नई में व्यावसायिक गैस उपयोगकर्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा। आने वाले समय में अन्य शहरों में भी इसी तरह की दरों में बदलाव संभव है, क्योंकि तेल कंपनियां पूरे देश में समान प्रक्रिया के तहत कीमतों का निर्धारण करती हैं।





