
Tamil Nadu तमिलनाडु : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में 13 मई को हुए विश्वास मत से जुड़ी कथित अनियमितताओं और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका अस्पष्ट और अनर्गल आरोपों पर आधारित है, इसलिए इस पर सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
यह याचिका एक अधिवक्ता की ओर से दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि विश्वास मत के दौरान विधायकों पर दबाव बनाया गया और कथित रूप से पैसे के जरिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट सीआर जया सुकिन ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश में कई नेता या तो दबाव में या फिर आर्थिक लालच में अपनी पार्टी बदल रहे हैं।
उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि कई मामलों में भ्रष्टाचार, रिश्वत और धमकी जैसी परिस्थितियों के कारण विधायक अपनी पार्टी छोड़ने को मजबूर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं के परिवारों को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर भी राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित किया जाता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता से सवाल किया कि वह किस राज्य या किस पार्टी के संदर्भ में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक दल बदलने की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन किसी भी गंभीर आरोप के लिए ठोस आधार जरूरी होता है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि केवल सामान्य या बिना सबूत के लगाए गए आरोपों के आधार पर न्यायिक जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत किसी भी मामले में जांच तभी संभव है जब उसके लिए स्पष्ट और विश्वसनीय आधार मौजूद हो।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह मामले न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य नहीं हैं।
कुल मिलाकर, अदालत के इस फैसले के साथ ही तमिलनाडु विधानसभा के विश्वास मत से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग फिलहाल समाप्त हो गई है।





