तमिलनाडू

Chennai : आग की घटना में झुलसे नवजात का सफल इलाज

Kavita2
29 April 2026 10:11 AM IST
Chennai : आग की घटना में झुलसे नवजात का सफल इलाज
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Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई के एग्मोर सरकारी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक नवजात बच्चे को गंभीर रूप से जलने के बाद उन्नत चिकित्सा तकनीकों की मदद से सफल इलाज देकर उसकी जान बचा ली। यह मामला मेडिकल सिस्टम की त्वरित प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ उपचार क्षमता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, चेन्नई के पेरंबूर निवासी आनंद बाबू की पत्नी धनलक्ष्मी ने हाल ही में पुरासिवक्कम स्थित करियप्पा स्ट्रीट के कॉर्पोरेशन मैटरनिटी हॉस्पिटल में एक बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्चे के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए उसे वार्मर में रखा गया था। इसी दौरान बिजली में लीकेज के कारण अचानक आग लग गई, जिससे नवजात बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया।

घटना के तुरंत बाद बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया और गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एग्मोर सरकारी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के शरीर का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। अस्पताल में भर्ती के समय उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी, शरीर का तापमान कम था और हृदय गति भी अनियमित थी।

डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू किया। जले हुए हिस्सों की सर्जरी की गई और त्वचा की मरम्मत के लिए आर्टिफिशियल ग्राफ्टिंग (कोलेजन ट्रीटमेंट) किया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण बच्चे को चार दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन दी गई।

इलाज के दौरान संक्रमण की समस्या भी सामने आई, जिसके चलते डॉक्टरों ने 14 दिनों तक एंटीबायोटिक्स का कोर्स चलाया। इसके अलावा, पोषण बनाए रखने के लिए तीसरे दिन से विशेष तकनीक के जरिए बच्चे को ब्रेस्ट मिल्क दिया गया, ताकि उसकी रिकवरी तेजी से हो सके।

लगातार 24 दिनों तक चले गहन इलाज के बाद बच्चे की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और अंततः उसे पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस मामले पर चेन्नई राजीव गांधी सरकारी जनरल हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने कहा कि यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण केस था, लेकिन टीम के समन्वित प्रयास और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की वजह से बच्चे की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि समय पर रेफरल और एडवांस ट्रीटमेंट इस सफलता की सबसे बड़ी वजह रही।

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि इस घटना से अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच की आवश्यकता पर जोर मिलता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता को दर्शाता है, बल्कि नवजात शिशु की जिंदगी बचाने में आधुनिक उपचार पद्धतियों की अहम भूमिका को भी उजागर करता है।

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