तमिलनाडू

Chennai HC ने कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज करने से किया इनकार

Kavita2
3 Jun 2026 9:25 AM IST
Chennai HC ने कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज करने से किया इनकार
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Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई हाई कोर्ट ने विरुधुनगर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर की जीत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया है। यह याचिका DMDK उम्मीदवार विजया प्रभाकरन द्वारा दाखिल की गई थी।

2024 के लोकसभा चुनाव में विरुधुनगर सीट पर कांग्रेस के मणिकम टैगोर और DMDK की ओर से विजया प्रभाकरन के बीच मुकाबला हुआ था। इस चुनाव में मणिकम टैगोर ने 4,379 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

चुनाव परिणाम के बाद विजया प्रभाकरन ने चेन्नई हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मणिकम टैगोर ने अपने नामांकन पत्र में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाया था और सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस एन. सतीशकुमार की अदालत में चल रही है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं।

इसी बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर की ओर से भी हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इसमें मांग की गई कि विजया प्रभाकरन द्वारा लगाए गए कुछ आरोपों को हटाया जाए और पूरे चुनाव केस को ही खारिज किया जाए।

हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया है और मामले को आगे सुनवाई के लिए जारी रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद ही किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचा जाएगा।

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है और आगे की सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विजया प्रभाकरन ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि यदि नामांकन प्रक्रिया में सही जानकारी दी गई होती, तो चुनाव परिणाम अलग हो सकता था। वहीं, कांग्रेस पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ था।

हाई कोर्ट में चल रहे इस मामले को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस चुनावी प्रक्रिया और नामांकन दस्तावेजों की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

अदालत ने अभी तक किसी भी पक्ष के पक्ष में अंतिम टिप्पणी नहीं की है और अगली सुनवाई में दोनों पक्षों से विस्तृत जवाब मांगे जाने की संभावना है।

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