
Tamil Nadu तमिलनाडु: पुलिस चेन्नई में तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (TNEB) के हेडक्वार्टर से डेटा स्टोरेज डिवाइस यानी हार्ड डिस्क की चोरी के मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह चोरी बोर्ड की सुरक्षा और डेटा प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती है और इसे जल्द से जल्द सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनियों में से एक है। पूरे राज्य में लगभग 3 करोड़ बिजली कनेक्शन, 1,500 सबस्टेशन, 1.80 लाख ट्रांसफॉर्मर और 82,000 कर्मचारियों के साथ यह बोर्ड देश के सबसे बड़े विद्युत बोर्डों में शुमार है। TNEB हर साल डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के लिए लगभग 5,000 कॉन्ट्रैक्ट प्राइवेट ठेकेदारों के माध्यम से देता है।
बोर्ड थर्मल और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट के ज़रिए बिजली का उत्पादन करता है। तमिलनाडु में बिजली की रोज़ाना डिमांड 15,000 MW से 16,000 MW तक होती है, जबकि गर्मियों में यह मांग 20,974 MW तक बढ़ जाती है। इसके बावजूद, तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड कई सालों से घाटे में चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग, मेंटेनेंस लागत और बिजली की कीमतों में असंतुलन इसके घाटे का मुख्य कारण है।
हार्ड डिस्क चोरी के मामले में पुलिस ने सुरक्षा कैमरों और इंटीरनल सिक्योरिटी सिस्टम की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि चोरी की गई हार्ड डिस्क में किस प्रकार का डेटा था और क्या इसके लीक होने से बोर्ड की कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है। बोर्ड का यह डेटा बिजली वितरण, कनेक्शन मैनेजमेंट और ट्रांसफॉर्मर के रखरखाव से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
इस घटना ने बोर्ड की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने कहा है कि चोरी के बाद सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र को और कड़ा किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि डेटा चोरी का मामला केवल बोर्ड की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि राज्य की बिजली व्यवस्था और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली बोर्ड जैसे बड़े सार्वजनिक संस्थान में डेटा सुरक्षा अत्यंत जरूरी है। हार्ड डिस्क में बिजली कनेक्शन, ट्रांसफॉर्मर मेंटेनेंस, सबस्टेशन की जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा मौजूद होते हैं। यदि यह डेटा लीक हो जाता है, तो न केवल बोर्ड बल्कि राज्य की बिजली आपूर्ति और नागरिकों की सुविधा पर भी असर पड़ सकता है।
इस बीच, पुलिस ने यह भी कहा कि सभी संभावित कोणों से जांच जारी है और इसमें आंतरिक कर्मचारियों, ठेकेदारों और बाहरी व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। बोर्ड की प्रबंधन टीम ने भी सभी कर्मचारियों को सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं और डेटा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के हेडक्वार्टर से हार्ड डिस्क चोरी का मामला केवल एक तकनीकी चोरी नहीं है, बल्कि यह राज्य के विद्युत व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। पुलिस और बोर्ड दोनों मिलकर इसे जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।





