तमिलनाडू

कावेरी जल विवाद फिर गरमाया, तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक से तुरंत पानी छोड़ने की मांग की

Kavita2
10 July 2026 9:15 AM IST
कावेरी जल विवाद फिर गरमाया, तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक से तुरंत पानी छोड़ने की मांग की
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Tamil Nadu तमिलनाडु: कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद तेज होता दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने कर्नाटक सरकार से कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी (CMA) द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार तमिलनाडु के हिस्से का पानी तत्काल छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कावेरी नदी किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति है और इसके जल का वितरण कानून तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप होना चाहिए।

गुरुवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक पोस्ट में तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक सरकार के हालिया रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सिंचाई मंत्री द्वारा तमिलनाडु को पानी नहीं छोड़े जाने संबंधी बयान सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहा है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी राज्य को दूसरे राज्य के वैध हिस्से का पानी रोकने का अधिकार मिल जाता है। प्राकृतिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन उनका समाधान संवैधानिक व्यवस्था और आपसी सहयोग के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि संघीय ढांचे की मजबूती तभी संभव है, जब सभी राज्य न्यायसंगत तरीके से अपने दायित्वों का पालन करें। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के किसानों की आजीविका को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम न केवल मानवीय दृष्टि से अनुचित है, बल्कि संघीय व्यवस्था की भावना के भी खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि कावेरी जैसी अंतरराज्यीय नदी का जल किसी एक राज्य का निजी संसाधन नहीं माना जा सकता। यह एक राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसका उपयोग सभी संबंधित राज्यों के वैधानिक अधिकारों और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। किसी भी राज्य को एकतरफा निर्णय लेकर पानी रोकने या अपने स्तर पर वितरण तय करने का अधिकार नहीं है।

तमिलनाडु कांग्रेस ने अपने बयान में कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी के निर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने स्पष्ट रूप से जून महीने के लिए तमिलनाडु को 9.91 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) पानी और जुलाई महीने के लिए 32 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इन आदेशों का पालन सभी संबंधित पक्षों के लिए अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े निर्णय विस्तृत तकनीकी अध्ययन, जल उपलब्धता और विभिन्न राज्यों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। ऐसे में किसी भी राज्य द्वारा इन आदेशों की अनदेखी करना उचित नहीं माना जा सकता।

अपने बयान में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसमें सूखे या जल संकट की स्थिति में प्रोपोर्शनल डिस्ट्रीब्यूशन (अनुपातिक वितरण) का सिद्धांत अपनाने की बात कही गई है। उनका कहना था कि यदि किसी वर्ष जल उपलब्धता कम होती है तो उसकी कमी का बोझ सभी संबंधित राज्यों को समानुपातिक रूप से साझा करना चाहिए। किसी एक राज्य द्वारा पूरे पानी पर नियंत्रण स्थापित करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक अपनी इच्छा के अनुसार बांधों के गेट बंद कर तमिलनाडु के हिस्से का पानी रोक नहीं सकता। यदि जल संकट है तो उसका समाधान कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी के आदेशों का पूरी तरह पालन हो और किसी भी राज्य के किसानों के साथ अन्याय न हो।

गौरतलब है कि कावेरी नदी का जल बंटवारा कई दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच संवेदनशील मुद्दा रहा है। दोनों राज्यों की कृषि काफी हद तक इस नदी के पानी पर निर्भर करती है। विशेष रूप से तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्र के किसान धान की खेती के लिए कावेरी के पानी पर आश्रित हैं, जबकि कर्नाटक भी अपने सिंचाई और पेयजल की जरूरतों के लिए इस नदी के जल का उपयोग करता है।

हर वर्ष मानसून की स्थिति के आधार पर जल उपलब्धता में बदलाव आने पर दोनों राज्यों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर जल वितरण की व्यवस्था लागू की जाती है।

तमिलनाडु कांग्रेस ने उम्मीद जताई है कि कर्नाटक सरकार संवैधानिक दायित्वों का पालन करते हुए कावेरी मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तमिलनाडु के हिस्से का पानी शीघ्र छोड़ेगी। उनका कहना है कि इससे न केवल किसानों के हितों की रक्षा होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग और विश्वास की भावना भी मजबूत होगी।

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