तमिलनाडू

जातिगत अत्याचार: Tamil Nadu कांग्रेस नेता ने कहा कि कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी

Kavita2
30 April 2026 9:34 AM IST
जातिगत अत्याचार: Tamil Nadu कांग्रेस नेता ने कहा कि कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सेल्वाप्पेरुंधगई ने राज्य में जाति आधारित अत्याचार और सामाजिक दबाव से जुड़ी घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होना ही इस तरह के अपराधों के लगातार बढ़ने का मुख्य कारण है।

उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से यह बयान जारी किया। अपने पोस्ट में उन्होंने पुदुक्कोट्टई जिले के कुलथुर तालुका के नादुपट्टी इलाके में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें हाशिए पर पड़े समुदाय के एक युवक हरिहरन की मौत हो गई थी। इस घटना को उन्होंने बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला बताया।

के. सेल्वाप्पेरुंधगई ने लिखा कि प्रेम संबंध के चलते सामाजिक और जातिगत दबाव के कारण युवक की मौत होना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने इसे मानवता और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ एक क्रूर कृत्य बताया। उनके अनुसार, आधुनिक और सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं का होना चिंता का विषय है और यह समाज के भीतर मौजूद पिछड़ेपन को उजागर करता है।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि युवाओं के खिलाफ जाति के आधार पर होने वाले अत्याचार सामाजिक न्याय के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में यदि समय पर और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, तो अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहती हैं।

उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि जाति आधारित धमकियों और हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार दोनों की यह जिम्मेदारी है कि युवाओं की जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी तरह के सामाजिक भेदभाव को समाप्त किया जाए।

सेल्वाप्पेरुंधगई ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब तक ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समाज में समानता और न्याय की भावना पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकती। उन्होंने इस घटना को एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बताते हुए इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस बयान के बाद राज्य में जाति आधारित अत्याचार के मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न स्तरों पर इस विषय पर प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

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