
चेन्नई : अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) ने विधानसभा में विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान करने वाले विधायक कामराज को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
एएमएमके के कोषाध्यक्ष करिकालन ने विधानसभा सचिवालय में विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विधायक कामराज ने पार्टी के महासचिव द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना करते हुए सदन में विश्वास मत के दौरान थावेका (टीवीके) सरकार के पक्ष में मतदान किया। यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है और दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का आधार बनता है।
करिकालन ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में विधायक पार्टी की नीतियों और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। यदि कोई विधायक सदन में पार्टी व्हिप या नेतृत्व के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत मतदान करता है, तो उसके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से कामराज की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि शिकायत में विस्तार से उल्लेख किया गया है कि विश्वास मत जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर विधायक का पार्टी लाइन से हटकर मतदान करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और दलगत अनुशासन दोनों के विरुद्ध है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में भी अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिल सकता है।
करिकालन के अनुसार, शिकायत प्राप्त करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने शिकायत स्वीकार कर ली है और नियमानुसार इस पर आगे की प्रक्रिया अपनाने की बात कही है। अब यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष को करना है कि उपलब्ध तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि किसी विधायक के विरुद्ध दल-बदल विरोधी कानून के तहत शिकायत की जाती है, तो विधानसभा अध्यक्ष संबंधित पक्षों से जवाब मांग सकते हैं। इसके बाद दस्तावेजों, पार्टी के निर्देशों, व्हिप और मतदान के रिकॉर्ड की जांच की जाती है। सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अध्यक्ष अंतिम निर्णय लेते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में हाल के दिनों में विश्वास मत और दलगत निष्ठा से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक दल अपने विधायकों से अपेक्षा करते हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय के अनुरूप मतदान करें। यदि कोई विधायक इससे अलग रुख अपनाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा दल बदलने या पार्टी के निर्देशों के विरुद्ध कार्य करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। हालांकि, किसी भी विधायक को अयोग्य घोषित करने का अंतिम अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास होता है, जो मामले के सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने के बाद निर्णय लेते हैं।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि शिकायत पर विस्तृत सुनवाई होती है, तो यह मामला राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक चर्चा का विषय बन सकता है।
फिलहाल एएमएमके अपने रुख पर कायम है और उसका कहना है कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वाले विधायक के खिलाफ नियमों के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, विधायक कामराज की ओर से इस शिकायत पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ेगी।





