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Madurai मदुरै: तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी दीपम (कार्तिक दीपम) से जुड़े विवाद के बीच एक युवक द्वारा आत्मदाह कर जान देने की घटना ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस घटना को लेकर तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने राज्य की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता नारायणन तिरुपथी ने कहा, “इस व्यक्ति ने अपनी जान गंवाई है और आत्महत्या की है। सवाल यह है कि क्यों? इसका सीधा कारण डीएमके सरकार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का रवैया उदासीन और असंवेदनशील रहा है, जिसके चलते आम लोगों में गहरी निराशा और आक्रोश फैल रहा है।
यह घटना मदुरै की तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां दीपम जलाने को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी को हिंदू समुदाय पवित्र स्थल मानता है और यहां कार्तिक दीपम का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष दीपम आयोजन से जुड़े प्रशासनिक फैसलों और कथित प्रतिबंधों को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही थी। भाजपा का आरोप है कि डीएमके सरकार ने इस धार्मिक मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते समाधान नहीं किया। नारायणन तिरुपथी ने कहा कि जब सरकार जनता की आस्था और भावनाओं की अनदेखी करती है, तो इसका परिणाम सामाजिक तनाव और ऐसी दुखद घटनाओं के रूप में सामने आता है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ले और दीपम विवाद का स्थायी समाधान निकाले।
भाजपा नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं से जुड़े विषयों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप या ढिलाई से जनता में असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके सरकार धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बहुसंख्यक समुदाय की आस्था को बार-बार नजरअंदाज कर रही है। वहीं, डीएमके की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कह चुका है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करती है।
इस बीच, युवक की आत्मदाह से मौत की घटना ने स्थानीय लोगों को भी झकझोर दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के पीछे के कारणों की पड़ताल की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मुद्दा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और तेज हो सकता है, क्योंकि धार्मिक आस्था, प्रशासनिक फैसलों और जनभावनाओं का यह टकराव सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
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