
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण सुधार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। कॉर्पोरेशन कमिश्नर जी.एस. समीरन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पेरुंगुडी लैंडफिल में बायोमाइनिंग प्रक्रिया के तहत रिक्लेम की गई जमीन पर कचरे से खाद बनाने की परियोजना को अगले जून तक लागू किया जाए। यह परियोजना शहर में कचरा निपटान और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चेन्नई में रोजाना बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसका एक हिस्सा पेरुंगुडी लैंडफिल में डंप किया जाता है। वर्षों से लगातार कचरा जमा होने के कारण इस क्षेत्र की जमीन और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा है। इसी समस्या के समाधान के लिए नगर प्रशासन ने बायोमाइनिंग तकनीक को अपनाया है, जिसके माध्यम से पुराने कचरे को अलग कर भूमि को पुनः उपयोग योग्य बनाया जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस पूरे प्रोजेक्ट को 350 करोड़ रुपये की लागत से छह चरणों (फेज़) में लागू किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 29.28 लाख क्यूबिक मीटर कचरे को अलग किया जा चुका है और वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रसंस्करण किया गया है। इस प्रक्रिया के जरिए कचरे को छांटकर उपयोगी और अनुपयोगी हिस्सों में विभाजित किया गया, जिससे जमीन को धीरे-धीरे पुनः उपयोग के लिए तैयार किया जा सके।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस योजना के पांच चरण पूरे हो चुके हैं और अब तक लगभग 96 एकड़ भूमि को सफलतापूर्वक रिक्लेम किया जा चुका है। यह भूमि पहले भारी मात्रा में कचरे के कारण अनुपयोगी हो गई थी, लेकिन बायोमाइनिंग प्रक्रिया के बाद इसे फिर से उपयोग में लाया जा रहा है।
कॉर्पोरेशन कमिश्नर जी.एस. समीरन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रिक्लेम की गई जमीन पर अब कचरे से खाद बनाने की यूनिट स्थापित की जाए। इस परियोजना का उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और उसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से उपयोग करना है। इससे न केवल लैंडफिल पर दबाव कम होगा, बल्कि शहर में कचरा प्रबंधन प्रणाली भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लागू होने से जैविक कचरे से खाद तैयार की जाएगी, जिसे कृषि और हरियाली बढ़ाने के कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा। इससे शहर में टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नगर निगम का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में शेष फेज़ भी पूरा किया जाए और पेरुंगुडी लैंडफिल को पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकसित किया जाए। इस पहल को शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





