
Tamil Nadu तमिलनाडु: विधानसभा चुनाव के दौरान एक प्रेरणादायक दृश्य सामने आया, जब राज्य के मुख्यमंत्री के मामा ने 102 वर्ष की उम्र में पोलिंग स्टेशन पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को प्रभावित किया बल्कि लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी आस्था को भी उजागर किया।
यह घटना तिरुमलम क्षेत्र की है, जो तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल का गृह नगर माना जाता है। दयालु अम्मल के बड़े भाई गो. दक्षिणमूर्ति, जो वर्तमान में 102 वर्ष के हैं, इसी शहर में रहते हैं। अपनी वृद्धावस्था के बावजूद उन्होंने मतदान के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि माना।
कुछ दिन पहले चुनावी प्रक्रिया के दौरान जब 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर पोस्टल वोट एकत्र करने वाले अधिकारी उनके पास पहुंचे, तो दक्षिणमूर्ति ने पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि वह अपने मतदान केंद्र पर जाकर ही वोट डालना चाहते हैं, क्योंकि यह उनके लिए लोकतंत्र के प्रति सम्मान और कर्तव्य निभाने का तरीका है।
गुरुवार को मतदान के दिन उन्होंने अपने संकल्प को पूरा किया। व्हीलचेयर की मदद से वे अपने घर के पास स्थित कोइल थिरुमलम पंचायत यूनियन मिडिल स्कूल में बने पोलिंग बूथ पर पहुंचे। वहां उन्होंने शांतिपूर्वक लाइन में लगकर अपना वोट डाला और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया।
मतदान केंद्र पर मौजूद लोगों ने 102 वर्षीय मतदाता को देखकर उनकी सराहना की। अधिकारियों ने भी उनके इस समर्पण को लोकतंत्र के प्रति मजबूत विश्वास का उदाहरण बताया। उम्र और शारीरिक सीमाओं के बावजूद मतदान केंद्र तक पहुंचना उनके जज्बे को दर्शाता है।
दक्षिणमूर्ति की यह पहल युवाओं और समाज के अन्य वर्गों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। यह घटना दिखाती है कि लोकतंत्र में भागीदारी उम्र पर निर्भर नहीं करती, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी और इच्छाशक्ति पर आधारित होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि मतदान केवल अधिकार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है, जिसे हर नागरिक को निभाना चाहिए।





