तमिलनाडू

Annamalai का बयान: 50 लाख सदस्य पर तय होगा राजनीतिक भविष्य

Kavita2
18 Jun 2026 9:48 AM IST
Annamalai का बयान: 50 लाख सदस्य पर तय होगा राजनीतिक भविष्य
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Tamil Nadu तमिलनाडु: पूर्व भाजपा नेता अन्नामलाई ने कहा है कि वे राजनीतिक पार्टी शुरू करने पर कोई अंतिम फैसला तभी लेंगे जब उनके नए आंदोलन ‘वी द लीडर्स’ के सदस्य 50 लाख तक पहुंच जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उनका ध्यान केवल आंदोलन को मजबूत करने और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर है।

बीजेपी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने ‘वी द लीडर्स’ नाम से एक नया जन आंदोलन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य समाज में बदलाव लाना बताया गया है। इस आंदोलन के लिए ऑनलाइन माध्यम से सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोग स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं।

बुधवार को अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा करते हुए इस आंदोलन की प्रगति और भविष्य की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल किसी पर थोपी नहीं जा रही है, बल्कि लोग अपनी इच्छा से इससे जुड़ रहे हैं। उनके अनुसार, यह आंदोलन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 18 लाख लोग इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। अन्नामलाई ने कहा कि जब सदस्यता का आंकड़ा 50 लाख तक पहुंच जाएगा, तब आंदोलन से जुड़े लोगों से यह राय ली जाएगी कि क्या इसे राजनीतिक रूप दिया जाना चाहिए या नहीं।

अन्नामलाई के अनुसार, किसी भी प्रकार का राजनीतिक निर्णय जनता की राय के आधार पर ही लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिलहाल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और लोगों को जोड़ना है, न कि तुरंत राजनीति में उतरना।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन में शामिल होने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा रहा है। सभी सदस्य अपनी इच्छा से इस पहल का हिस्सा बन रहे हैं। उनका कहना था कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमें लोगों की भागीदारी ही सबसे महत्वपूर्ण है।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अन्नामलाई की भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके समर्थक इस आंदोलन को एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जबकि फिलहाल संगठन के विस्तार पर ही जोर दिया जा रहा है।

अन्नामलाई ने कहा कि आने वाले समय में जब पर्याप्त संख्या में लोग जुड़ जाएंगे, तब ही यह तय किया जाएगा कि क्या इस आंदोलन को एक राजनीतिक पार्टी में बदला जाए या इसे सामाजिक मंच के रूप में ही जारी रखा जाए।

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