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चेन्नई। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नयनार नागेंद्रन की मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मां को लेकर की गई टिप्पणी पर राज्य की राजनीति गरमा गई है। तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके के नेताओं के बाद अब भाजपा छोड़ चुके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी नागेंद्रन के बयान की कड़ी निंदा की है। अन्नामलाई ने कहा कि राजनीतिक विरोध के दौरान किसी नेता के परिवार, विशेष रूप से उसकी मां को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विवाद की शुरुआत तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके विधायकों की ओर से लगाए जा रहे पिताजी कहां हैं के नारों से हुई। ये नारे विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को निशाना बनाकर लगाए जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नयनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री विजय और उनकी मां को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी। उनका कहना था कि विधानसभा में पिता को खोजने के बजाय विजय को अपने घर जाकर इस बारे में पूछना चाहिए।
नागेंद्रन के बयान का वीडियो सामने आने के बाद टीवीके नेताओं ने इसे अशोभनीय और अपमानजनक बताया। टीवीके नेता राज मोहन ने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से इस प्रकार की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने पार्टी की ओर से बयान की निंदा करते हुए नागेंद्रन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद के अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और राजनीतिक दलों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी नेता के परिवार को अपमानित करना राजनीतिक आलोचना नहीं हो सकती। उनके अनुसार मुख्यमंत्री विजय की मां को विवाद में शामिल करके नागेंद्रन ने राजनीतिक मर्यादा की सीमाएं पार कर दी हैं।
अन्नामलाई ने इस बात पर भी जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद कितने ही गंभीर क्यों न हों, सार्वजनिक जीवन में भाषा का स्तर बनाए रखना प्रत्येक नेता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नेताओं के बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं और नई पीढ़ी को भी संदेश मिलता है। इसलिए व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों को सामान्य राजनीतिक व्यवहार नहीं बनने देना चाहिए।
हालांकि नागेंद्रन की तरफ से इस ताजा विवाद पर अभी कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने यह टिप्पणी किस संदर्भ या भाव में की। टीवीके ने कहा है कि राजनीतिक जवाब नीति, प्रशासन और विधानसभा के भीतर उठाए गए मुद्दों पर दिया जाना चाहिए, न कि परिवार के सदस्यों को विवाद में शामिल करके।
तमिलनाडु में मई 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता का समीकरण बदल गया था। अभिनेता से राजनेता बने विजय के नेतृत्व में टीवीके ने सरकार बनाई और विजय मुख्यमंत्री बने। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चुनाव हारने के कारण विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। उनकी अनुपस्थिति में उदयनिधि स्टालिन विपक्ष की कमान संभाल रहे हैं। विधानसभा में टीवीके और डीएमके के सदस्यों के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है।
पिताजी कहां हैं का नारा भी इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा माना जा रहा है। टीवीके के विधायक इस नारे के जरिए उदयनिधि और डीएमके की वंशवादी राजनीति पर हमला करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके जवाब में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विजय को घेरने की कोशिश की, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया व्यक्तिगत विवाद में बदल गई।
भाजपा भी तमिलनाडु की राजनीति में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के प्रयास में विजय सरकार पर लगातार हमला कर रही है। हालांकि इस मामले में भाजपा के पूर्व नेता अन्नामलाई ने अपनी पुरानी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का समर्थन करने के बजाय उनकी सार्वजनिक आलोचना की है। अन्नामलाई जून 2026 में भाजपा छोड़कर नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं। ने उनके भाजपा से बाहर होने और नया राजनीतिक दल शुरू करने की घोषणा की पुष्टि की थी।
इस विवाद ने तमिलनाडु में राजनीतिक संवाद की भाषा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। टीवीके नेताओं का कहना है कि विपक्ष को सरकार के फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन महिलाओं और परिवार के सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक राजनीति को कमजोर करता है।
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