तमिलनाडू

पलातरंगराई नदी किनारे मिली भगवान विष्णु की प्राचीन पत्थर की मूर्ति

Kavita2
9 Aug 2026 9:06 AM IST
पलातरंगराई नदी किनारे मिली भगवान विष्णु की प्राचीन पत्थर की मूर्ति
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रानीपेट। पुलियानकन्नुन पंचायत क्षेत्र में पलातरंगराई नदी के किनारे भगवान विष्णु की पत्थर की एक प्राचीन मूर्ति मिलने से इलाके में चर्चा का माहौल है। नदी किनारे मिली करीब दो फीट ऊंची इस मूर्ति को स्थानीय लोगों ने भगवान विष्णु का स्वरूप मानते हुए पहले श्रद्धापूर्वक उठाया और बाद में गांव के पोन्नियम्मन मंदिर में स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की। मूर्ति मिलने की जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पहुंचे और दर्शन किए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पलातरंगराई नदी के किनारे क्षेत्र के कुछ लोगों की नजर एक पत्थर की मूर्ति पर पड़ी। मूर्ति सामान्य पत्थर से अलग दिखाई दे रही थी और उस पर भगवान विष्णु के स्वरूप की आकृति नजर आ रही थी। लोगों ने इसकी जानकारी अन्य ग्रामीणों को दी। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने मूर्ति को वहां से उठाकर पास स्थित पोन्नियम्मन मंदिर में ले जाकर स्थापित कर दिया।

मूर्ति को मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद ग्रामीणों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी। लोगों ने भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा मानकर विशेष पूजा की और दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग मंदिर पहुंचने लगे। मूर्ति की प्राचीनता और उसके नदी किनारे मिलने को लेकर ग्रामीणों में उत्सुकता बनी हुई है। कई लोग इसे ऐतिहासिक महत्व की प्रतिमा मान रहे हैं, जबकि इसकी वास्तविक उम्र और निर्माण काल के बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मूर्ति मिलने और उसे मंदिर में स्थापित किए जाने की जानकारी पुलिस तथा राजस्व विभाग तक पहुंची। सूचना मिलने के बाद सिबकट पुलिस और वलाजा तालुकदार नटराजन के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने मंदिर में रखी मूर्ति का निरीक्षण किया और प्रारंभिक जानकारी जुटाई। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मूर्ति को मंदिर से बाहर निकालकर अपने कब्जे में ले लिया।

राजस्व विभाग की टीम मूर्ति को वलाजा तालुकदार के कार्यालय लेकर पहुंची, जहां उसे सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब मूर्ति की पहचान और उसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच का इंतजार किया जा रहा है।

बताया गया है कि यह पत्थर की मूर्ति करीब दो फीट ऊंची है। मूर्ति का आधा सिर टूटा हुआ है, जिसके कारण उसका स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसके बावजूद मूर्ति पर दिखाई देने वाली आकृतियों के आधार पर स्थानीय लोगों ने इसे भगवान विष्णु की प्रतिमा माना है। हालांकि, मूर्ति वास्तव में किस काल की है, इसका निर्माण किस प्रकार के पत्थर से हुआ है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है, इन सभी सवालों का जवाब विशेषज्ञों की जांच के बाद ही मिल सकेगा।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में पुरातत्व अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है। पुरातत्व विशेषज्ञों द्वारा मूर्ति का अध्ययन किए जाने के बाद ही इसके संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मूर्ति की बनावट, शिल्पकला, पत्थर की प्रकृति, टूट-फूट तथा उस पर मौजूद आकृतियों का अध्ययन कर इसके संभावित काल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगा सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मूर्ति की पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी है और इसका संबंध किसी प्राचीन मंदिर, धार्मिक स्थल या ऐतिहासिक परंपरा से रहा है या नहीं। प्रशासन ने फिलहाल मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर रख दिया है, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और विशेषज्ञों की जांच तक उसे किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

मूर्ति मिलने की घटना के बाद इलाके में लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे प्राचीन वस्तुओं या मूर्तियों का मिलना क्षेत्र के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। लोगों को उम्मीद है कि पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच से इस प्रतिमा के संबंध में कोई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकता है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से मूर्ति की आधिकारिक पहचान या उसकी प्राचीनता को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञों की जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मूर्ति के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जा सकेगी।

पलातरंगराई नदी के किनारे मिली भगवान विष्णु की यह प्रतिमा अब प्रशासन के संरक्षण में है। पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच के बाद यह तय होगा कि मूर्ति कितने समय पुरानी है और उसका ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व कितना है। इस बीच, मूर्ति मिलने की घटना ने स्थानीय लोगों के बीच धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को लेकर भी नई जिज्ञासा पैदा कर दी है।

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